ईरान के पेट्रोलियम मंत्री Mohsen Paknejad भारत पहुंचे हैं और उन्होंने दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की इच्छा जताई है। वह गुरुग्राम में होने वाली 11वीं BRICS Energy Ministers’ Meeting में हिस्सा लेने आए हैं। इस मुलाकात से भारत में तेल की सप्लाई और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।

BRICS मीटिंग और द्विपक्षीय चर्चा

मंत्री Paknejad 25 और 26 जून 2026 को होने वाली मीटिंग में शामिल होंगे। इस दौरे के दौरान वह भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री Hardeep Singh Puri और अन्य BRICS देशों के ऊर्जा मंत्रियों से बात करेंगे। ईरान ने साफ किया है कि वह भारत के साथ अलग-अलग आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए तैयार है ताकि दोनों देशों के पुराने रिश्तों को और मजबूती मिले।

तेल सप्लाई और व्यापार का इतिहास

ईरान के राजदूत Mohammad Fathali ने बताया कि एक समय पर भारत और ईरान के बीच सालाना व्यापार 17 अरब डॉलर से ज्यादा हुआ करता था। उन्होंने कहा कि अगर प्रतिबंध हटते हैं, तो ईरान फिर से भारत के लिए तेल का एक बड़ा स्रोत बन सकता है। वहीं, भारत के चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर V. Anantha Nageswaran ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने से कच्चे तेल की कीमतों में कमी आ सकती है, जिससे भारत का आयात खर्च घटेगा और आर्थिक दबाव कम होगा।

ताजा स्थिति और अमेरिकी छूट

भारत ने लगभग सात साल के गैप के बाद अप्रैल 2026 से फिर से ईरान से कच्चा तेल खरीदना शुरू किया है। जून 2026 में भारत ने करीब 73,000 बैरल प्रतिदिन तेल मंगाया। यह सब इसलिए मुमकिन हो पाया क्योंकि अमेरिका ने Bürgenstock agreement के तहत ईरान को 60 दिनों की विशेष छूट दी है, जिससे ईरान अपना तेल और पेट्रोकेमिकल बेच पा रहा है।

कंपनियों में अभी भी सावधानी

भले ही बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन भारत की तेल कंपनियां अभी पूरी तरह भरोसा नहीं कर पा रही हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि वे अमेरिकी प्रतिबंधों पर और ज्यादा स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं। मुख्य रूप से पेमेंट करने के तरीके और लॉजिस्टिक्स यानी तेल पहुंचाने की व्यवस्था को लेकर अब भी कुछ दिक्कतें बनी हुई हैं।