Iran On US Israel: ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा दावा, अमेरिका और इसराइल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से किया था हमला लेकिन सब हुआ फेल.

Sushma Kumari10 August 20262 min read68 viewsWorld
Iran On US Israel: ईरान के राष्ट्रपति पेजेशकियन का बड़ा दावा, अमेरिका और इसराइल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से किया था हमला लेकिन सब हुआ फेल.

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 10 अगस्त 2026 को यह बड़ा बयान दिया है कि अमेरिका और इसराइल ने मिलकर ईरान के खिलाफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल करते हुए आक्रामकता की जंग शुरू की थी। तेहरान विश्वविद्यालय में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने साफ तौर पर कहा कि दुश्मन देशों ने AI डेटा, जासूसी नेटवर्क और किराए के लोगों के जरिए ईरान को कमजोर करने की जो साजिश रची थी, उसे पूरी तरह से नाकाम कर दिया गया है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान की मौजूदा स्थिरता और सुरक्षा पूरी तरह से इस्लामिक क्रांति के शहीद नेता Ayatollah Seyyed Ali Khamenei के मार्गदर्शन का नतीजा है। दुश्मन की हर चाल को ईरान के सुरक्षा बलों ने समय रहते समझ लिया और उनके मंसूबों पर पानी फेर दिया।

आईआरजीसी का बयान और अमेरिकी तकनीक की विफलता

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्स यानी IRGC के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल Hossein Mohebi ने भी इसी दिन राष्ट्रपति के बयानों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपनी सबसे आधुनिक सैन्य तकनीकों और AI का खुलकर इस्तेमाल किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें असफलता ही हाथ लगी।

ब्रिगेडियर जनरल मोहेबी ने बताया कि भले ही AI ने अलग-अलग डेटा स्रोतों के जरिए लक्ष्यों का विश्लेषण किया हो, लेकिन वह इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान की संस्थागत और वैचारिक ताकत की निगरानी करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ। इसके अलावा, उन्होंने देश की अपनी तकनीकी क्षमताओं का जिक्र करते हुए कहा कि ईरान ने दुश्मन के नेटवर्क के एक हिस्से को बाधित करने के लिए अपनी मिसाइल और ड्रोन संपत्तियों का भी प्रभावी इस्तेमाल किया।

फरवरी 2026 के हमलों का पिछला इतिहास

ये तमाम बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब अमेरिका और इसराइल के बीच चल रहे सैन्य तनाव के तहत 28 फरवरी 2026 को Operation Epic Fury नामक समन्वित हमले शुरू किए गए थे। इन ऑपरेशनों में मुख्य रूप से ईरान की मिसाइलों, वायु रक्षा प्रणालियों, सैन्य बुनियादी ढांचे और शीर्ष नेतृत्व को निशाना बनाया गया था, जिसमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत की खबर भी सामने आई थी।

इन घटनाओं के बाद ईरान समर्थक 60 से ज्यादा हैक्टिविस्ट समूहों ने अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया था, जहां AI टूल्स ने उनके अभियानों के लिए तकनीकी बाधाओं को और कम कर दिया। राष्ट्रपति पेजेशकियन पहले भी अमेरिका और इसराइल पर यह आरोप लगा चुके हैं कि वे ईरान की अंदरूनी चुनौतियों का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं और फारस की खाड़ी के देशों को इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ भड़काने का प्रयास कर रहे हैं।

Share:

Comments

Leave a comment