ईरान ने पाकिस्तान के शांति प्रयासों की की तारीफ, ट्रंप ने बढ़ाया युद्धविराम लेकिन ईरानी बंदरगाहों की कर दी नाकाबंदी

मिडल ईस्ट में जारी युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान काफी मेहनत कर रहा है और ईरान ने इस कोशिश की तारीफ की है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान शांति लाने के लिए जो प्रयास कर रहा है, उसकी कद्र की जाएगी। हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है क्योंकि युद्धविराम के बीच कुछ नए विवाद खड़े हो गए हैं।

अमेरिका ने युद्धविराम क्यों बढ़ाया और नाकाबंदी क्यों की?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के कहने पर ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया था। ट्रंप ने कहा कि यह युद्धविराम तब तक रहेगा जब तक ईरान बातचीत के लिए एक ठोस प्रस्ताव पेश नहीं करता। लेकिन इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी का आदेश दिया। ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद ग़ालिबफ ने आरोप लगाया कि नाकाबंदी करके अमेरिका ने ही युद्धविराम तोड़ा है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता और बातचीत का क्या रहा असर?

पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच की दूरी कम करने के लिए लगातार काम कर रहा है। इसके तहत कुछ मुख्य बातें सामने आई हैं:

  • 11-12 अप्रैल 2026: इस्लामाबाद में पहली बार अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत हुई, जिसमें पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
  • 22 अप्रैल 2026: पाकिस्तान के प्रधान मंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगादम से मुलाकात कर क्षेत्रीय शांति पर चर्चा की।
  • दूसरे दौर की वार्ता: इस्लामाबाद में बातचीत के दूसरे दौर की तैयारी की गई थी, लेकिन ईरान के विरोध के कारण यह बैठक नहीं हो सकी।

ईरान और अमेरिका के बीच अब क्या स्थिति है?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने साफ किया कि तेहरान अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठा रहा है। 23 अप्रैल 2026 को युद्धविराम बढ़ने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य में दो जहाजों पर गोलीबारी की खबर आई। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन का कहना है कि बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए दोनों पक्षों के बीच विश्वास होना जरूरी है। पाकिस्तान अभी भी दोनों देशों को एक मेज पर लाने की कोशिश कर रहा है।