Gulf देशों में फूट डाल रहे हैं अमेरिका और इसराइल, राष्ट्रपति Pezeshkian ने मुस्लिम एकता का किया आह्वान

ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने शुक्रवार, 7 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान देते हुए अमेरिका और इसराइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि ये देश पर्शियन गल्फ के देशों को तेहरान के खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं और ईरान की आंतरिक चुनौतियों का गलत फायदा उठा रहे हैं। यह जानकारी ANI News के माध्यम से सामने आई है। राष्ट्रपति का मानना है कि मुस्लिम देशों की एकता ही बाहरी दबावों से बचने का एकमात्र रास्ता है और ईरान किसी भी तरह की जबरदस्ती को स्वीकार नहीं करेगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य और सुरक्षा पर सरकार का रुख
गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने साफ किया कि Strait of Hormuz में ईरान की ओर से की गई कार्रवाई नियमों का उल्लंघन करने वाले जहाजों के खिलाफ थी। उन्होंने देश के भीतर किसी भी प्रकार के मतभेद की खबरों को सिरे से खारिज किया। राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि ईरानी सरकार और सशस्त्र बल पूरी तरह से एकजुट हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि विदेश नीति से जुड़े सभी बड़े फैसले और सैन्य निर्णय सुप्रीम लीडर की मंजूरी और सशस्त्र बलों के बीच समन्वय के साथ लिए जा रहे हैं। उनका यह बयान उन लोगों के लिए एक संदेश था जो देश में फूट डालने की कोशिश में लगे हैं।
क्षेत्रीय तनाव और आने वाले बदलाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है। 7 अगस्त 2026 को अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है। हालांकि, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने संकेत दिए हैं कि ईरान के साथ 30 से 60 दिनों का संघर्ष विराम समझौता जल्द हो सकता है, जिससे हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकेगा। ओमान और ईरान के बीच इस मामले को लेकर बातचीत में प्रगति हुई है, और उम्मीद है कि जल्द ही ईरान के बंदरगाहों पर लगा अमेरिकी नाकेबंदी का दबाव कम हो जाएगा।
दूसरी ओर, शनिवार 8 अगस्त 2026 को हॉर्मुज जलडमरूमध्य में एक ADNOC जहाज को मिसाइल से निशाना बनाया गया। गनीमत रही कि इस हमले में किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है। इन सभी घटनाओं का असर गल्फ में रहने वाले लाखों प्रवासियों पर भी पड़ता है, क्योंकि इस क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति ही यहाँ के व्यापार और नौकरियों को प्रभावित करती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित संघर्ष विराम से क्षेत्र में शांति बहाल हो पाती है या नहीं।