ईरान में बिजली का बड़ा संकट खड़ा हो गया है. राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने देश के लोगों से बिजली बचाने की गुहार लगाई है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी और इजरायली हमलों ने देश के ऊर्जा ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है. अब सरकार बिजली की खपत को नियंत्रित करना चाहती है ताकि बुनियादी सुविधाओं को बचाया जा सके.
राष्ट्रपति ने बिजली बचाने के लिए क्या अपील की?
25 अप्रैल, 2026 को राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने नागरिकों से सीधे तौर पर बिजली कम इस्तेमाल करने को कहा. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि घर में 10 लाइट जलाने के बजाय केवल 2 लाइट जलाइए, इसमें कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. यह बयान उन्होंने उस समय दिया जब पाकिस्तान में अमेरिका के साथ शांति वार्ता चल रही थी. ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल इस वार्ता के दूसरे दौर के लिए इस्लामाबाद गया है.
ईरान में ऊर्जा संकट की बड़ी वजह क्या है?
ईरान सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल ने उसके बुनियादी ढांचे और ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाया है. इसके साथ ही अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी भी कर रखी है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 24 अप्रैल, 2026 को चेतावनी दी कि इस संघर्ष की वजह से इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट पैदा हो गया है. इस तनाव के कारण होर्मुज जलसंधि में समुद्री यातायात भी प्रभावित हुआ है.
ऊर्जा संकट से जुड़ी अन्य मुख्य बातें
- पुराना सिस्टम: राष्ट्रपति ने स्वीकार किया कि पुराने बुनियादी ढांचे, निवेश की कमी और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों की वजह से ईंधन की कमी हुई है.
- संयंत्रों को नुकसान: विशेषज्ञों के अनुसार, मध्य पूर्व में 40 से अधिक तेल और गैस संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है, जिससे संकट लंबे समय तक रह सकता है.
- स्वयंसेवकों की तैयारी: 7 अप्रैल, 2026 को राष्ट्रपति ने कहा था कि 1.4 करोड़ ईरानी स्वयंसेवक देश के लिए बलिदान देने को तैयार हैं.
- सुरक्षा अपील: ईरानी मंत्री ने लोगों से बिजली संयंत्रों की सुरक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाने की भी अपील की थी.