ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिका के साथ चल रही बातचीत का खुलकर बचाव किया है। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार जो भी कूटनीतिक कदम उठा रही है, वह सुप्रीम लीडर की मंजूरी और उनके आदेश के बाद ही लिया गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कुछ कट्टरपंथी गुट इस बातचीत का विरोध कर रहे हैं।
ℹ️: UAE Lottery Update: एक और विजेता ने जीती 30 मिलियन दिरहम की जैकपॉट राशि, हुआ ऐलान।
राष्ट्रपति Pezeshkian ने अमेरिका के साथ हुए एक समझौते (MoU) को ईरान के लिए एक बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि इस समझौते की वजह से ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंध हटे हैं, जो देश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि बातचीत के दौरान ईरान ने अपने किसी भी राष्ट्रीय अधिकार या बुनियादी सिद्धांतों से समझौता नहीं किया है।
सुप्रीम लीडर की भूमिका और मंजूरी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्च 2026 में अली खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया था। Mojtaba Khamenei ने 18 जून 2026 को अमेरिका के साथ सीधी बातचीत की आधिकारिक मंजूरी दी थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि शुरू में उनके विचार अलग थे, लेकिन राष्ट्रपति Pezeshkian के इस भरोसे के बाद कि देश के हितों की रक्षा होगी, उन्होंने अपनी अनुमति दे दी।
राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं, बल्कि देश की आधिकारिक संस्थाओं और सामूहिक फैसलों के आधार पर काम करती है। इस समझौते के मसौदे की जांच सुरक्षा विशेषज्ञों और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने भी की थी और उन्हें इसका पूरा समर्थन मिला था।
पैसों की वापसी और आंतरिक विरोध
इस बातचीत के चलते कतर में जमा ईरान की 12 अरब डॉलर की संपत्ति में से 6 अरब डॉलर जारी करने पर भी चर्चा हुई है। राष्ट्रपति Pezeshkian ने आरोप लगाया कि देश के अंदर कुछ गुट जानबूझकर बातचीत करने वाली टीम को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि संवाद की प्रक्रिया बाधित हो सके।
इसके साथ ही उन्होंने पुराने सुप्रीम लीडर आयतुल्ला खामेनेई के उस रुख को दोहराया कि ईरान का मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है और वह इस सिद्धांत पर कायम है।
