ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दुनिया को साफ संदेश दिया है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता और बातचीत के लिए हमेशा तैयार है। उन्होंने कहा कि ईरान ने अपनी जिम्मेदारियों को निभाया है और शांति बनाए रखने की हर कोशिश की है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि दबाव या जोर-जबर्दस्ती से ईरान को झुकाना नामुमकिन है।

बातचीत और युद्ध को लेकर ईरान की क्या सोच है?

राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के मुताबिक डिप्लोमेसी में एक-दूसरे का सम्मान करना युद्ध से कहीं ज्यादा बेहतर और सुरक्षित है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने बताया कि देश की डिप्लोमेसी और मिलिट्री ऑपरेशंस के बीच पूरा तालमेल है। उन्होंने कहा कि जहां बातचीत की जरूरत होगी वहां बातचीत करेंगे और जहां लड़ना पड़ा वहां लड़ेंगे। ईरान अपने हितों की रक्षा के लिए हर संभव रास्ता अपनाएगा। राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि देश की चुनौतियों से निपटने के लिए अब नए और रचनात्मक समाधानों की जरूरत है।

अमेरिका और इसराइल के लिए क्या चेतावनी जारी हुई?

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने कड़ी चेतावनी दी है कि अगर उनके खिलाफ फिर से हमला हुआ तो यह युद्ध पूरे इलाके में फैल सकता है। IRGC का कहना है कि उन्होंने अभी तक अमेरिका और इसराइल के खिलाफ अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है। वहीं, डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर Kazem Gharibabadi ने अमेरिका की आलोचना की और कहा कि ईरान के लिए सरेंडर करने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह एक तरफ हमलों को रोकने की बात करता है और दूसरी तरफ बड़े हमले की तैयारी करता है।

  • राष्ट्रपति का रुख: बातचीत के रास्ते खुले हैं लेकिन दबाव काम नहीं करेगा।
  • विदेश मंत्री का बयान: जरूरत पड़ने पर लड़ाई और बातचीत दोनों के लिए तैयार।
  • IRGC की चेतावनी: हमले हुए तो क्षेत्रीय युद्ध का खतरा बढ़ेगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

राष्ट्रपति Pezeshkian ने डिप्लोमेसी के बारे में क्या कहा?

उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान पर आधारित डिप्लोमेसी युद्ध की तुलना में अधिक टिकाऊ और सुरक्षित होती है और ईरान ने हमेशा युद्ध टालने के रास्ते खोजे हैं।

IRGC ने अमेरिका और इसराइल को क्या चेतावनी दी?

IRGC ने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो युद्ध पूरे क्षेत्र में फैल सकता है क्योंकि अभी उनकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं हुआ है।