पश्चिम एशिया में ईरान और इसराइल के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच युद्ध विराम खत्म होने के बाद सोमवार को टकराव के 100 दिन पूरे हो गए। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियान ने एक बड़ा बयान देकर दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने साफ किया है कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है और वह किसी भी धमकी के आगे झुकने वाला नहीं है, लेकिन बातचीत के रास्ते भी बंद नहीं किए गए हैं।
ईरान के राष्ट्रपति ने अपने बयान में क्या कहा?
ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखी। उन्होंने रक्षा और कूटनीति को देश की ताकत के दो पंख बताया। राष्ट्रपति ने कहा कि देश की सुरक्षा और जनता की शांति उनकी सबसे पहली प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अपने अधिकारों की रक्षा पूरी ताकत के साथ करेगा और किसी भी खतरे के सामने पीछे नहीं हटेगा। उनका कहना था कि ईरान ने न तो जंग का मैदान छोड़ा है और न ही बातचीत की मेज को छोड़ा है।
तनाव बढ़ने की मुख्य वजहें और हालिया घटनाएं
इसराइल और ईरान के बीच अप्रैल में हुआ युद्ध विराम टूटने के बाद से सीधा सैन्य टकराव जारी है। इसराइल द्वारा बेरुत और ईरान के अंदर रडार ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने सोमवार को इसराइल पर मिसाइलें दागीं। इसे ‘ऑपरेशन नसर’ नाम दिया गया, जिसके तहत रामत डेविड, तेल नोफ और नेवातित एयरबेस को निशाना बनाया गया। इस मिसाइल हमले के बाद इराक और सीरिया ने अपने पश्चिमी हिस्से की हवाई सीमा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जबकि इसराइल ने गाजा के रास्तों को बंद करने की घोषणा की है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देश तुरंत युद्ध विराम चाहते हैं और शांति समझौते को लेकर बातचीत चल रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान के राष्ट्रपति ने बातचीत और रक्षा को लेकर क्या बयान दिया?
राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियान ने कहा कि ईरान अपने देश की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने रक्षा और कूटनीति को देश की ताकत के दो पंख बताया और कहा कि उन्होंने न तो मैदान छोड़ा है और न ही बातचीत का रास्ता बंद किया है।
ईरान और इसराइल के बीच तनाव अचानक क्यों बढ़ गया?
दोनों देशों के बीच अप्रैल में हुआ युद्ध विराम खत्म हो गया है, जिसके बाद सीधे सैन्य हमले शुरू हो गए। ईरान ने इसराइली हवाई ठिकानों पर मिसाइलें दागीं, जिसके बाद पड़ोसी देशों ने अपनी हवाई सीमाएं बंद कर दीं।
