ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दुनिया को साफ़ कह दिया है कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता और बातचीत के लिए तैयार है। लेकिन उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर उनके दुश्मनों ने उन पर अपनी बात थोपने या उन्हें सरेंडर कराने की कोशिश की, तो वे इसमें नाकाम रहेंगे। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पूरे इलाके में तनाव बहुत ज़्यादा बढ़ गया है।
युद्ध और बातचीत पर क्या है ईरान का रुख?
राष्ट्रपति Pezeshkian ने साफ़ किया कि ईरान शांति चाहता है और बातचीत का रास्ता खुला है। हालांकि, पिछले कुछ दिनों में हालात काफी बिगड़े हैं। 13 अप्रैल को अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध रोकने की बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई। अब 22 अप्रैल को होने वाले युद्धविराम की समयसीमा खत्म होने का डर बढ़ गया है।
कितना नुकसान हुआ और क्या है ताज़ा विवाद?
ईरान ने उन पांच देशों से युद्ध के मुआवजे की मांग की है, जिनके इलाकों का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए हुआ। सरकारी प्रवक्ता Fatemeh Mohajerani ने बताया कि 28 फरवरी 2026 से अब तक ईरान को करीब 266 अरब डॉलर का सीधा और अप्रत्यक्ष नुकसान हुआ है। इसके अलावा, 14 अप्रैल को अमेरिका ने Strait of Hormuz की घेराबंदी शुरू कर दी है, जिस पर ईरान ने कड़ा ऐतराज जताया है।
पाकिस्तान और IAEA की क्या भूमिका है?
इस पूरे विवाद को सुलझाने में पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है ताकि दोनों देश बातचीत की मेज़ पर आ सकें। दूसरी तरफ, IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने एक बड़ी बात कही है। उन्होंने कहा कि अगर परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका और ईरान बिना IAEA की सलाह के कोई समझौता करते हैं, तो वह सिर्फ एक भ्रम होगा।
