ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ़ कहा है कि अमेरिकी कोशिशें नाकाम होंगी क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। इस टकराव की वजह से खाड़ी क्षेत्र में तनाव और अस्थिरता बढ़ने की आशंका है, जिससे व्यापार में भी बड़ी रुकावटें आ सकती हैं।

📰: Kuwait Road Update: कुवैत की सड़कें होंगी अब और बेहतर, मंत्री ने खुद किया मुआयना, काम में तेज़ी लाने का दिया आदेश

अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान का क्या कहना है?

राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 30 अप्रैल, 2026 को बयान दिया कि ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने का अमेरिकी प्रयास विफल होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कदम से क्षेत्रीय सुरक्षा को बढ़ावा मिलने के बजाय स्थायी शांति को नुकसान पहुँचेगा। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 29 अप्रैल को कहा कि यह नाकेबंदी कई महीनों तक चल सकती है। अमेरिकी रक्षा सचिव Pete Hegseth ने भी 25 अप्रैल को घोषणा की थी कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक ज़रूरी होगा।

क्या समुद्र में युद्ध की स्थिति बन रही है?

ईरान की तरफ से सैन्य चेतावनी भी आई है। सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार Mojtaba Khamenei ने 29 अप्रैल को कहा कि अगर नाकेबंदी जारी रही तो ईरान इसका जवाब देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस लड़ाई में अमेरिकी जहाज डूब सकते हैं और सैनिकों को बंदी बनाया जा सकता है। वहीं, ईरान के नौसेना कमांडर Shahram Irani ने संकेत दिया है कि वे बहुत जल्द नए नौसैनिक हथियार तैनात करेंगे। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) ने बताया कि 29 अप्रैल को एक वाणिज्यिक जहाज को नाकेबंदी तोड़ने से सफलतापूर्वक रोका गया था।

तेल की कीमतों और दुनिया पर इसका क्या असर पड़ेगा?

इस पूरे विवाद का असर वैश्विक बाज़ार पर दिख रहा है। अमेरिका ने 13 अप्रैल, 2026 को यह नाकेबंदी शुरू की थी, जिसके बाद से तेल की कीमतों में उछाल आया है। ईरान ने Strait of Hormuz को बंद रखा है, जो तेल और गैस की सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता है। इस स्थिति से चीन सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकता है क्योंकि वह ईरान के तेल का 90 प्रतिशत से ज़्यादा हिस्सा खरीदता है। ईरान के तेल मंत्री Mohsin Paknezhad ने हालांकि कहा है कि इस नाकेबंदी से अमेरिका को कोई फायदा नहीं होगा।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान की नाकेबंदी कब और क्यों की?

अमेरिका ने 13 अप्रैल, 2026 को ईरान के बंदरगाहों और तटों पर नौसैनिक नाकेबंदी लगाई। यह कदम इस्लामाबाद वार्ता के बाद उठाया गया क्योंकि 2026 के ईरान युद्ध को समाप्त करने की बातचीत विफल हो गई थी।

इस नाकेबंदी का असर किन देशों पर ज़्यादा पड़ रहा है?

इस नाकेबंदी से तेल की कीमतें बढ़ गई हैं और चीन सबसे ज़्यादा प्रभावित हो सकता है क्योंकि वह ईरान के तेल का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खरीदता है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com