ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने दुनिया को साफ कर दिया है कि वे बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ईरान घुटने टेक देगा। उन्होंने कहा कि देश के हितों और लोगों के अधिकारों की रक्षा करना उनकी पहली प्राथमिकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है और दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर हैं।

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बातचीत और अमेरिका के साथ संबंधों पर क्या है ईरान का रुख?

राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 10 मई 2026 को स्पष्ट किया कि बातचीत करना समर्पण या हार मानना नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरानी लोग किसी दुश्मन के आगे कभी नहीं झुकेंगे और बातचीत का मकसद केवल देश के अधिकारों को सुरक्षित करना है।

  • दबाव का विरोध: उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वाशिंगटन एक तरफ “अधिकतम दबाव” की नीति अपना रहा है और दूसरी तरफ ईरान से अपनी शर्तें मानने की उम्मीद करता है।
  • भरोसे की कमी: राष्ट्रपति ने कहा कि वे अमेरिका पर भरोसा नहीं करते क्योंकि पिछले समझौतों के दौरान अमेरिका ने धोखा दिया था।
  • शर्तें: ईरान राजनयिक रास्तों से अमेरिका और इजराइल के साथ विवाद खत्म करने को तैयार है, लेकिन तभी जब ईरान के अधिकारों की पूरी सुरक्षा हो।

UAE पर हमले और IRGC को लेकर राष्ट्रपति के कड़े बोल

देश के अंदर भी राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं। 4 मई 2026 की रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) द्वारा UAE पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की कड़ी निंदा की।

  • गैर-जिम्मेदाराना कदम: राष्ट्रपति ने इन हमलों को पूरी तरह गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि इसके लिए सरकार से कोई अनुमति नहीं ली गई थी।
  • सुप्रीम लीडर से मुलाकात: स्थिति को संभालने के लिए उन्होंने सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei से मुलाकात की ताकि IRGC के हमलों को रोका जा सके और बातचीत का रास्ता खुले।
  • राष्ट्रीय एकता: उन्होंने देश के लोगों से एकता बनाए रखने की अपील की और कहा कि बाहरी दबावों को देश की प्रगति में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा।

समुद्री तनाव और अंतरराष्ट्रीय भूमिका

क्षेत्र में तनाव केवल बातों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समुद्र में भी टकराव देखा गया है। 9 मई 2026 को खबर आई कि अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में ईरान के तेल टैंकरों को निष्क्रिय कर दिया, जो कि अमेरिकी नाकेबंदी का हिस्सा था।

  • समुद्री विवाद: Strait of Hormuz में भी तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान अमेरिका के शांति प्रस्तावों पर विचार कर रहा है।
  • मध्यस्थता: इस पूरे विवाद में पाकिस्तान ने एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई है, जिसकी वजह से अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच 8 अप्रैल 2026 से एक सशर्त युद्धविराम लागू है।
  • रणनीतिक साझेदार: राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने फ्रांस और रूस के साथ भी चर्चा की है, जिसमें रूस को ईरान का एक रणनीतिक साझेदार माना गया है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

राष्ट्रपति पेज़ेश्कियन ने बातचीत को लेकर क्या कहा?

उन्होंने स्पष्ट किया कि बातचीत करना सरेंडर करना नहीं है। ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और लोगों के अधिकारों की रक्षा करते हुए ही किसी भी चर्चा में शामिल होगा।

UAE पर हुए हमलों को लेकर ईरान सरकार का क्या स्टैंड था?

राष्ट्रपति ने IRGC द्वारा UAE पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों को गैर-जिम्मेदाराना बताया और कहा कि यह कार्रवाई सरकार की अनुमति के बिना की गई थी।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का मुख्य कारण क्या है?

मुख्य कारण अमेरिका की “अधिकतम दबाव” वाली नीति और ईरान के तेल टैंकरों को रोकना है, जबकि ईरान अपने अधिकारों और संप्रभुता की मांग कर रहा है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.