ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कर दिया है कि उनका देश किसी भी दबाव या धमकी के माहौल में बातचीत नहीं करेगा। 25 अप्रैल 2026 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ फोन पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका वार्ता और युद्धविराम के दौरान दबाव बनाने वाला रवैया अपना रहा है। राष्ट्रपति ने वॉशिंगटन की समुद्री पाबंदियों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया है।

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ईरान ने अमेरिका पर क्या आरोप लगाए हैं?

राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि अमेरिका की समुद्री पाबंदियां और धमकी भरे बयान उसकी कूटनीतिक प्रतिबद्धता पर संदेह पैदा करते हैं। ईरान का मानना है कि बातचीत शुरू करने के लिए अमेरिका को पहले ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जैसी बाधाओं को हटाना होगा। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी नाकेबंदी को युद्धविराम का उल्लंघन बताया और कहा कि वाणिज्यिक जहाजों पर हमला करना और उनके चालक दल को बंधक बनाना एक बड़ा अपराध है।

पाकिस्तान और अमेरिका की इस विवाद में क्या भूमिका है?

  • पाकिस्तान: प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई है। उन्होंने दोनों देशों के बीच संवाद आसान बनाने की इच्छा जाहिर की है।
  • अमेरिका: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दबाव में बातचीत न करने के फैसले का हवाला देते हुए पाकिस्तान में अमेरिकी दूतों की यात्रा रद्द कर दी। ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंधों और नौसैनिक नाकेबंदी को और तेज कर दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र: ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने अमेरिका पर पोत ज़ब्ती और अंतरराष्ट्रीय कानून तोड़ने का औपचारिक आरोप लगाया है।

पिछले कुछ दिनों में क्या बड़े बदलाव हुए?

25 और 26 अप्रैल 2026 के दौरान तनाव काफी बढ़ गया है। अमेरिका द्वारा नाकेबंदी जारी रखने के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को जब्त किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान का दौरा किया और वहां से ओमान के लिए रवाना हुए। वहीं 23 अप्रैल को ईरानी सरकार की तीनों शाखाओं के प्रमुखों ने इस्लामी क्रांति के सिद्धांतों के प्रति अपनी निष्ठा दोहराते हुए कुछ आरोपों का बचाव किया था।