ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने बातचीत और समझौतों को लेकर अपना रुख साफ कर दिया है। IRNA News Agency के मुताबिक, उन्होंने कहा कि ईरान अपनी शर्तों और अधिकारों की रक्षा के लिए बातचीत करेगा, न कि किसी के सामने घुटने टेकने के लिए। राष्ट्रपति ने साफ किया कि देश की गरिमा और आजादी से कोई समझौता नहीं होगा।

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ईरान बातचीत को लेकर क्या चाहता है?

राष्ट्रपति Pezeshkian ने बताया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के दायरे में रहकर किसी भी बातचीत के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि बातचीत का मकसद ईरान के जायज अधिकारों की रक्षा करना है। राष्ट्रपति ने यह भी साफ किया कि अमेरिका की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ वाली नीति काम नहीं करेगी और ईरान कभी भी जबरदस्ती या दबाव में आकर कोई फैसला नहीं लेगा।

दुनिया के अन्य देशों के साथ क्या हुई बातचीत?

  • फ्रांस: राष्ट्रपति Emmanuel Macron से बातचीत में पेज़ेशकियन ने कहा कि अमेरिका ने कूटनीति को धमकियों और प्रतिबंधों में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि बातचीत तभी होगी जब युद्ध खत्म होगा और गारंटी मिलेगी कि हमला दोबारा नहीं होगा।
  • इराक: इराक के प्रधानमंत्री-निर्वाचित Ali Falih al-Zaydi से फोन पर बात हुई, जिसमें ईरान ने कानूनी ढांचे में बातचीत की इच्छा जताई।
  • क्षेत्रीय देश: राष्ट्रपति ने आसपास के देशों से अपील की कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने दें।

दबाव और धमकियों पर राष्ट्रपति का क्या कहना है?

राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि पिछली बातचीत के दौरान भी ईरान पर दो बार हमले हुए थे। उन्होंने कहा कि आज भी सैन्य तैनाती और धमकियां जारी हैं। उनका मानना है कि मुसलमान सिर्फ ईश्वर के आगे झुकते हैं, किसी बाहरी दबाव के आगे नहीं। उन्होंने भरोसा जताया कि जनता के सहयोग से देश हर मुश्किल को पार कर लेगा और विदेशी साजिशें उसे प्रगति के रास्ते से नहीं रोक सकेंगी।

Frequently Asked Questions (FAQs)

राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने बातचीत के बारे में क्या कहा?

उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन यह बातचीत अधिकारों की रक्षा के लिए होगी, न कि सरेंडर करने के लिए।

ईरान ने अमेरिका की नीतियों पर क्या प्रतिक्रिया दी?

राष्ट्रपति ने अमेरिका की ‘मैक्सिमम प्रेशर’ नीति की आलोचना की और कहा कि धमकियों और प्रतिबंधों के जरिए कूटनीति नहीं चलाई जा सकती।