ईरान में चल रहे तनाव के बीच अब सोशल मीडिया पर प्रोपेगेंडा का दौर शुरू हो गया है। जाली वीडियो और तस्वीरों के जरिए दुनिया को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है। इसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का नाम भी सामने आया है जिन्होंने कुछ ऐसी ही फर्जी खबरें शेयर की थीं। Al Jazeera की रिपोर्ट में बताया गया है कि कैसे बाहरी दखल को बढ़ावा देने के लिए महिलाओं की तस्वीरों का इस्तेमाल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला और ट्रंप की भूमिका?

Al Jazeera की पत्रकार सोराया लेनी ने बताया कि ईरानी महिलाओं की असली और नकली तस्वीरों का इस्तेमाल करके विदेशी हस्तक्षेप को सही ठहराने की कोशिश की जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने एक एक्टिविस्ट के दावे को शेयर किया था जिसमें कहा गया था कि ईरान में आठ महिलाओं को फांसी दी जाएगी। हालांकि, 22 अप्रैल 2026 को ईरान की न्यायपालिका ने इस खबर को खारिज कर दिया। सरकार ने साफ कहा कि ट्रंप को एक बार फिर ‘फेक न्यूज’ के जरिए बहलाया गया है।

AI वीडियो और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के नए नियम

आजकल AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनी फर्जी वीडियो बहुत तेजी से फैल रही हैं। डोनाल्ड ट्रंप खुद एक AI वीडियो के झांसे में आ गए थे जिसमें एक एयरक्राफ्ट कैरियर जलता हुआ दिख रहा था। इसे रोकने के लिए X ने 3 मार्च 2026 को एक नया नियम लागू किया। अब अगर कोई बिना बताए युद्ध से जुड़ी AI तस्वीरें शेयर करेगा, तो उसके अकाउंट की कमाई 90 दिनों के लिए बंद कर दी जाएगी।

फर्जी खबरों के पीछे कौन है और क्या है सच्चाई?

X के प्रोडक्ट हेड निकिता बीयर ने खुलासा किया कि फरवरी 2026 में पाकिस्तान के एक व्यक्ति ने 31 अकाउंट्स हैक किए थे। उसने इन अकाउंट्स का नाम ‘Iran War Monitor’ रखकर AI से बनी युद्ध की फर्जी वीडियो डाली थीं। इस तरह के झूठ को पकड़ने के लिए BBC Verify और Full Fact जैसे संगठन काम कर रहे हैं। फ्रांस 24 ने भी बताया कि आधुनिक युद्ध में AI से बनी गलत जानकारी एक बड़ी चुनौती बन गई है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com