ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में एक बड़ा मोड़ आया है। ईरान की तरफ से आने वाले नए संशोधित प्रस्ताव में देरी हो रही है क्योंकि वहां के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei से संपर्क करना मुश्किल हो गया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा कारणों से उनकी लोकेशन गुप्त रखी गई है, जिससे पूरी प्रक्रिया धीमी पड़ गई है।
ईरान के नए प्रस्ताव में देरी क्यों हो रही है?
CNN की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है, जिसकी वजह से संशोधित प्रस्ताव को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Aragchi रूस से वापस लौटे हैं ताकि वे अपने देश के नेताओं से सलाह कर सकें, लेकिन Mojtaba Khamenei की अनुपलब्धता ने इस पूरी प्रक्रिया को धीमा कर दिया है। कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि ईरान के नेतृत्व के भीतर आंतरिक मतभेद हैं, जिसकी वजह से फैसले लेने में समय लग रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच अभी क्या स्थिति है?
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के पिछले प्रस्ताव को पहले ही खारिज कर दिया था। Trump ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी कि ईरान ने अमेरिका को अपनी स्थिति ‘State of Collapse’ यानी ढहती हुई अवस्था में बताई है। ईरान चाहता है कि जब तक वह अपनी नेतृत्व स्थिति को ठीक करता है, तब तक Strait of Hormuz खुला रहे। इस पूरे मामले में पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और वह ईरान के नए संशोधित प्रस्ताव का इंतज़ार कर रहा है।
सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei का रुख क्या है?
- Mojtaba Khamenei ने 8 मार्च 2026 को अपने पिता के बाद सुप्रीम लीडर का पद संभाला था।
- वे अपनी सख्त विचारधारा के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने दबाव बनाने के लिए Strait of Hormuz को बंद रखने की बात कही है।
- Reuters की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने तनाव कम करने के प्रस्तावों को ठुकरा दिया और मांग की कि अमेरिका और इसराइल को पहले घुटनों पर लाया जाए और उनसे मुआवजा लिया जाए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
पाकिस्तान का इस मामले में क्या रोल है?
पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ (mediator) के तौर पर काम कर रहा है और दोनों देशों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
Mojtaba Khamenei कौन हैं?
वह ईरान के वर्तमान सुप्रीम लीडर हैं, जिन्होंने 8 मार्च 2026 को पद संभाला और अपनी सख्त नीतियों तथा अमेरिका-इसराइल के प्रति कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं।