ईरान ने इंटरनेट केबल को लेकर एक ऐसा प्रस्ताव रखा है जिससे पूरी दुनिया का डिजिटल नेटवर्क हिल सकता है। ईरान के एक सांसद ने मांग की है कि उनके समुद्री इलाके यानी Strait of Hormuz से गुजरने वाली फाइबर-ऑप्टिक केबल्स के लिए विदेशी देशों और कंपनियों से सालाना फीस ली जाए। इस कदम का मकसद ईरान के लिए कमाई का नया जरिया बनाना है जिससे इंटरनेट चलाने वाली बड़ी कंपनियों और कई देशों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
ईरान का नया प्रस्ताव और उसकी शर्तें क्या हैं?
ईरान की संसद के सदस्य Hossein Ali Hajideligani ने कहा है कि Strait of Hormuz ईरान का एक प्राकृतिक खजाना है और इससे कमाई होनी चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव दिया है कि जो भी देश या कंपनी यहाँ से गुजरने वाली केबल्स का इस्तेमाल करती है उसे हर साल फीस देनी होगी। ईरान इस मामले में मिस्र (Egypt) के Suez Canal मॉडल को अपनाना चाहता है जहाँ केबल्स के लिए ट्रांजिट फीस ली जाती है।
IRGC से जुड़ी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान तीन बड़े कदम उठा सकता है:
- विदेशी केबल मालिकों से शुरुआती लाइसेंसिंग और सालाना रिन्यूअल फीस लेना।
- Meta, Amazon और Microsoft जैसी टेक कंपनियों को ईरान के घरेलू कानूनों का पालन करने के लिए मजबूर करना।
- केबल्स की मरम्मत और देखरेख का पूरा कंट्रोल सिर्फ ईरानी कंपनियों को देना।
किन देशों और कंपनियों पर पड़ेगा असर?
इस प्रस्ताव का सीधा असर दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों और उन देशों पर पड़ेगा जो इंटरनेट के लिए इन केबल्स पर निर्भर हैं। इनमें भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और यूरोप के देश शामिल हैं।
| प्रभावित क्षेत्र/कंपनियां | विवरण |
|---|---|
| टेक कंपनियां | Meta, Amazon, Microsoft और Google |
| प्रभावित क्षेत्र | भारत, यूरोप और दक्षिण पूर्व एशिया |
| मुख्य केबल नेटवर्क | AAE-1, FALCON, GBI और Gulf-TGN |
| दैनिक ट्रांजैक्शन | करीब 10 ट्रिलियन डॉलर तक के वित्तीय लेनदेन |
इंटरनेट और बैंकिंग सेवाओं के लिए क्यों है खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान ने इस योजना को लागू किया तो ग्लोबल इंटरनेट ट्रैफिक, बैंकिंग ट्रांजैक्शन और क्लाउड सेवाओं में बड़ी रुकावट आ सकती है। ईरान का दावा है कि इन केबल्स के जरिए रोजाना अरबों डॉलर का लेनदेन होता है। वह इस पैसे का इस्तेमाल तेल निर्यात में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए करना चाहता है जो करीब 220 मिलियन डॉलर रोजाना बताया गया है। ईरान का तर्क है कि UNCLOS के नियमों के तहत समुद्री तल (seabed) पर उसका अधिकार है और बिना अनुमति के केबल बिछाना उसकी जमीन पर कब्जा करने जैसा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान इंटरनेट केबल्स पर फीस क्यों लगाना चाहता है?
ईरान Strait of Hormuz को अपना राष्ट्रीय संसाधन मानता है और तेल निर्यात में होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राजस्व जुटाना चाहता है।
इस फैसले से कौन सी बड़ी कंपनियां प्रभावित होंगी?
Meta, Amazon, Microsoft और Google जैसी बड़ी टेक कंपनियां प्रभावित होंगी क्योंकि उनके डेटा केबल्स इस रास्ते से गुजरते हैं।
क्या इससे भारत पर असर पड़ेगा?
हाँ, भारत और दक्षिण पूर्व एशिया को जोड़ने वाले प्रमुख फाइबर-ऑप्टिक केबल नेटवर्क इस रास्ते से गुजरते हैं जिससे डिजिटल सेवाओं में बाधा आ सकती है।
