ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर एक नया कानूनी ढांचा पेश किया है। इस नए प्रस्ताव के तहत ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से ट्रांजिट फीस यानी रास्ता शुल्क वसूलने की तैयारी में है। ईरान का कहना है कि यह नया नियम सुरक्षा और नेविगेशन को बेहतर बनाने के लिए जरूरी है, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है।

ईरान के नए कानून में देशों के लिए क्या हैं नियम?

ईरान की संसद ने एक योजना को मंजूरी दी है जिसके तहत इस समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने वाले देशों को अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। इस योजना के तहत देशों को ‘दोस्त’, ‘तटस्थ’ और ‘दुश्मन’ की लिस्ट में रखा जाएगा। अमेरिका और इसराइल जैसे देशों को शत्रु की श्रेणी में रखा गया है और उनके जहाजों के वहां से गुजरने पर पाबंदी लगाने की बात कही गई है। अन्य देशों के जहाजों को अब इस रास्ते का उपयोग करने के लिए फीस चुकानी होगी।

समुद्री व्यापार और सुरक्षा से जुड़ी मुख्य जानकारियां

ईरान ने साफ किया है कि यह नया कानून तब तक लागू रहेगा जब तक उसे युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई नहीं मिल जाती। इस स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चिंता जताई जा रही है क्योंकि होर्मुज के रास्ते से ही दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल का व्यापार करता है। कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े और बातें नीचे दी गई हैं:

  • फीस का इस्तेमाल
  • मुख्य बिंदु विवरण
    जहाजों की संख्या 5 अप्रैल 2026 तक 24 घंटों में केवल 15 जहाजों को ही वहां से जाने की अनुमति मिली।
    वसूला गया पैसा इंफ्रास्ट्रक्चर के पुनर्निर्माण और सुरक्षा व्यवस्था में खर्च किया जाएगा।
    ओमान की भूमिका ओमान इस जलमार्ग को लेकर ईरान के साथ बातचीत कर रहा है, जहां दो रास्ते संचालित हैं।
    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया यूके समेत 40 देशों ने इस मामले पर चर्चा की है और कूटनीतिक दबाव बनाने की योजना बनाई है।

    IRGC और पाकिस्तान का क्या कहना है?

    ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब रणनीतिक बदलाव आ चुके हैं और स्थिति कभी भी पहले जैसी नहीं होगी। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रज़ा अमीरी मोघदाम ने भी बताया कि युद्ध को रोकने के प्रयास अब एक नाजुक मोड़ पर पहुंच गए हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भी ईरान की इन धमकियों और नए नियमों पर मतदान करने की तैयारी में है, ताकि वैश्विक व्यापार को किसी भी बड़े संकट से बचाया जा सके।

    Sushma Kumari

    Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com