ईरान ने गल्फ देशों, खासकर फारस की खाड़ी से सटे देशों के साथ सुरक्षा समझौतों के लिए अपनी सहमति जताई है। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने साफ किया है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सहयोग करने को तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने एक बड़ी शर्त रखी है कि सुरक्षा के साथ-साथ देशों के बीच मजबूत आर्थिक रिश्ते होना भी जरूरी है।
अजरबैजान के बाकू में आयोजित ओआईसी सदस्य देशों के संसदीय संघ (PUIC) के 20वें सत्र में 24 जून 2026 को गालिबफ ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि ईरान उन सभी कोशिशों का समर्थन करता है जिनसे आर्थिक, व्यापारिक, वित्तीय और वैज्ञानिक सहयोग बढ़े। गालिबफ के मुताबिक, इस इलाके का भविष्य लड़ाई-झगड़े में नहीं बल्कि मिलजुल कर रहने में है। उन्होंने यह भी मांग की कि क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद यहां के देशों को लेनी चाहिए और विदेशी सेनाओं को यहां से हटा देना चाहिए क्योंकि उनकी मौजूदगी से अस्थिरता बढ़ती है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) को लेकर भी बड़ा अपडेट आया है। 23 जून 2026 को गालिबफ ने घोषणा की कि इस जलमार्ग का प्रबंधन अब तेहरान द्वारा किया जाएगा। इसके लिए ईरान और ओमान ने एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई है ताकि जहाजों के आने-जाने के लिए नया ढांचा तैयार किया जा सके। यह कदम 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते (MOU) के बाद उठाया गया है, जिसका मकसद तनाव कम करना और व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खोलना है। अमेरिका ने भी 30 दिनों के भीतर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का वादा किया है।
इस पूरे मामले में आर्थिक निवेश की भी चर्चा है। गालिबफ ने बताया कि ईरान और अमेरिका के बीच समझ के तहत लगभग 300 अरब डॉलर के निवेश की बात है, जिसका इस्तेमाल पुनर्निर्माण और मुआवजे के लिए होगा। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह पैसा अमेरिका सीधे नहीं देगा, बल्कि प्रतिबंध हटाकर निजी और तीसरे पक्ष के निवेश को आसान बनाएगा। ईरान ने यह संकेत भी दिया कि भविष्य में गल्फ देशों के साथ मिलकर बनाया जाने वाला कोई भी ब्लॉक चीन और ईरान के इर्द-गिर्द केंद्रित हो सकता है।
दूसरी तरफ, कई गल्फ देश ईरान के इस प्रस्ताव और अमेरिका के साथ उसके समझौते को लेकर शंका में हैं। उन्हें डर है कि इससे ईरान और ज्यादा ताकतवर हो सकता है और क्षेत्र का संतुलन बिगड़ सकता है। यही वजह है कि ये देश अब अपनी रक्षा क्षमता बढ़ा रहे हैं और अमेरिका के अलावा अन्य देशों के साथ भी सुरक्षा रिश्ते बना रहे हैं। कतर के पूर्व प्रधानमंत्री हमद बिन जसीम अल थानी ने तो एयर डिफेंस और समुद्री सुरक्षा के लिए नाटो (NATO) की तरह एक सुरक्षा गठबंधन बनाने की बात भी कही है।
इस बीच, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी गल्फ देशों का दौरा किया ताकि उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाया जा सके। रूबियो ने साफ कर दिया कि किसी भी देश को, जिसमें ईरान भी शामिल है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों से टोल टैक्स वसूलने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
