Iran News: ईरान में प्रदर्शनकारियों को फांसी दिए जाने पर फूटा गुस्सा, 32 देशों ने की कड़ी निंदा और लगाई रोक की गुहार.

ईरान में सरकार के खिलाफ आवाज उठाने वाले प्रदर्शनकारियों को लगातार दी जा रही मौत की सजा के मामले में दुनिया भर के कई देश खुलकर सामने आ चुके हैं। बर्लिन और तेहरान से सामने आई जानकारी के मुताबिक, ईरान में हो रही इन सख्त कार्रवाइयों के खिलाफ कुल 32 देशों ने संयुक्त रूप से अपनी गहरी आपत्ति जताई है। इन देशों में यूरोप के 29 देश शामिल हैं, इसके अलावा कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और नूजीलैंड ने भी ईरान सरकार से अपील की है कि वह वहां के नागरिकों के बुनियादी अधिकारों का पूरा सम्मान करे और मौत की सजा के नियमों पर तुरंत रोक लगाए। इस पूरे मामले को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ती जा रही है और मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट ने स्थिति को और भी ज्यादा गंभीर बना दिया है।
जर्मनी के विदेश मंत्रालय ने साझा किया संयुक्त बयान
जर्मनी के विदेश मंत्रालय की तरफ से एक आधिकारिक साझा बयान जारी किया गया है। इस बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि ईरान के आम नागरिकों को किसी भी तरह के डर के बिना अपनी बात कहने की आजादी यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। इसके साथ ही लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने की पूरी छूट होनी चाहिए। इन तमाम देशों ने ईरानी नेतृत्व से खास तौर पर यह आग्रह किया है कि वे अपनी जनता की आवाज़ सुनें और देश में मानवाधिकारों की रक्षा के लिए ठोस तथा कड़े कदम उठाएं, ताकि आम जनता को राहत मिल सके और बेकसूर लोगों की जान बचाई जा सके।
संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों के चौंकाने वाले आंकड़े
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क के अनुसार, जब से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव और युद्ध जैसे हालात शुरू हुए हैं, तब से देश में फांसी और मौत की सजा दिए जाने के मामलों में भारी तेजी आई है। उनके आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 19 मार्च के बाद से अब तक कम से कम 56 लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े गंभीर आरोपों के तहत फांसी के फंदे पर लटकाया जा चुका है। इनमें इस साल की शुरुआत में हुए बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जुड़े लगभग 27 लोग भी शामिल हैं। इसके अलावा, ईरान में मानवाधिकारों पर नजर रखने वाले एक संगठन अब्दोर्रहमान बोरूमंद सेंटर का दावा है कि साल 2026 की शुरुआत से लेकर अब तक कुल 916 लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी है। संगठन के मुताबिक अकेले अगस्त के महीने में अब तक 15 लोगों को मृत्युदंड दिया गया है, हालांकि इन सभी आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी संभव नहीं हो पाया है।
यूरोपीय संघ ने पहले भी जताई थी गहरी चिंता
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए यूरोपीय संघ की विदेश नीति और सुरक्षा मामलों की राजनयिक इकाई यूरोपियन एक्सटर्नल एक्शन सर्विस ने बीते अप्रैल के महीने में भी ईरान में लगातार बढ़ रही फांसी की संख्या पर कड़ी चिंता व्यक्त की थी। उस समय भी ईयू ने मृत्युदंड के इन आंकड़ों को बेहद डरावना और चिंताजनक बताया था तथा प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार किए गए सभी बेकसूर लोगों को तुरंत रिहा करने की मांग उठाई थी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार यह कोशिश कर रहा है कि ईरान सरकार अपने इन फैसलों पर पुनर्विचार करे, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अभी भी काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं और वहां की न्याय व्यवस्था के फैसलों को लेकर पूरी दुनिया में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।