ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi और कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani के बीच रविवार, 17 मई 2026 को फोन पर बातचीत हुई। इस कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव और क्षेत्रीय विकास पर अपने विचार साझा किए। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए कतर एक अहम भूमिका निभा रहा है।
कतर ने Strait of Hormuz की सुरक्षा को लेकर क्या कहा?
कतर के प्रधानमंत्री Sheikh Mohammed bin Abdulrahman Al Thani ने बातचीत में साफ किया कि Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही (freedom of navigation) बनी रहना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस रास्ते को बंद करना या इसे किसी दबाव के लिए इस्तेमाल करना गलत होगा, क्योंकि इससे पूरे क्षेत्र के हितों को नुकसान पहुंचेगा। कतर ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करने और अच्छे पड़ोसी की तरह व्यवहार करने की बात कही ताकि क्षेत्रीय सुरक्षा मजबूत हो सके।
ईरान का अमेरिका और ज़ायोनी शासन पर क्या स्टैंड है?
ईरान के विदेश मंत्री Araghchi ने अपनी बातों में अमेरिका और ज़ायोनी शासन द्वारा ईरान पर थोपे गए युद्ध का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ईरान तनाव को कम करने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहा है और चाहते हैं कि वर्तमान गतिरोध को जल्द से जल्द खत्म किया जाए। दोनों देशों के मंत्रियों ने इस बात पर सहमति जताई कि क्षेत्रीय संकटों को सुलझाने के लिए आपसी बातचीत और तालमेल जरूरी है।
क्या कतर अन्य देशों के साथ भी मध्यस्थता कर रहा है?
इस बातचीत के अलावा, कतर के प्रधानमंत्री ने उसी दिन सऊदी अरब के विदेश मंत्री और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से भी फोन पर बात की। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम (ceasefire) करवाना और क्षेत्र में स्थिरता लाना था। गौरतलब है कि 10 मई 2026 को भी ईरान और कतर के विदेश मंत्रियों के बीच इसी तरह की चर्चा हुई थी, जिसमें क्षेत्रीय मुद्दों और Strait of Hormuz पर बात की गई थी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान और कतर की बातचीत का मुख्य मुद्दा क्या था?
बातचीत का मुख्य मुद्दा क्षेत्रीय तनाव को कम करना, शांति समझौते के लिए राजनयिक प्रयासों को बढ़ाना और Strait of Hormuz में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना था।
कतर इस समय किन अन्य देशों के साथ संपर्क में है?
कतर अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के प्रयासों के लिए सऊदी अरब और पाकिस्तान जैसे देशों के साथ भी राजनयिक संपर्क बनाए हुए है।
