ईरान और कतर के बीच तनाव कम करने के लिए बड़ी बातचीत हुई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची और कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने फोन पर बात की। दोनों देशों ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते सैन्य तनाव को रोकने और बातचीत से मामला सुलझाने पर जोर दिया है।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव बहुत बढ़ गया है। 7 जुलाई को हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो टैंकरों पर हमला हुआ था। अमेरिका और खाड़ी देशों ने इसके लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में अमेरिका ने 8 जुलाई की सुबह ईरान की जमीन पर जवाबी हमले किए।
ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत पर हमले किए और एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया। ईरान का दावा है कि उसने इलाके में मौजूद 85 अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
मामला तब और बिगड़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अंकारा में नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच पिछले महीने हुआ समझौता (MoU) अब खत्म हो चुका है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन पर इस समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने तेल प्रतिबंधों में ढील खत्म कर दी और सैन्य हमले किए।
इसी बीच कतर ने भी 7 जुलाई को ईरान के डिप्टी एम्बेसडर को एक विरोध पत्र भेजा था। कतर ने अपने टैंकर ‘अल रेकायत’ पर हुए हमले की निंदा की। हालांकि, ईरान ने 8 जुलाई को इन आरोपों को खारिज कर दिया और कहा कि यह बात गलत है।
दुनिया के कई देशों और बड़े नेताओं ने इस लड़ाई को रोकने की अपील की है। पाकिस्तान, ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और संयुक्त राष्ट्र प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम बरतने को कहा है ताकि एक बड़ा क्षेत्रीय युद्ध न छिड़ जाए। वहीं ईरान का कहना है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखना उसका संप्रभु अधिकार है।
