ईरान के क़ेशम आइलैंड और सिरिक के पास ज़ोरदार धमाकों की आवाज़ें सुनी गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इतना बढ़ गया है कि Strait of Hormuz में सैन्य गतिविधियाँ तेज़ हो गई हैं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में बेचैनी का माहौल है और दुनिया की नज़रें इस रणनीतिक जलमार्ग पर टिकी हैं।
अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर किए हमले
US Central Command (CENTCOM) ने जानकारी दी कि 10 जून 2026 को अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में हवाई बचाव सिस्टम, रडार और ड्रोन कमांड यूनिट्स पर हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की उन क्षमताओं को कम करने के लिए की गई जिससे वह अमेरिकी सेना और व्यापारिक जहाजों पर नज़र रखता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने स्पष्ट किया कि 8 जून को एक ईरानी ड्रोन द्वारा अमेरिकी Apache हेलीकॉप्टर गिराए जाने के बाद अमेरिका ने यह कड़ा सैन्य जवाब दिया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान द्वारा दागी गई ज़्यादातर मिसाइलों और ड्रोनों को हवा में ही रोक लिया गया और अमेरिकी सैनिकों को कोई नुकसान नहीं पहुँचा।
ईरान की प्रतिक्रिया और Strait of Hormuz की स्थिति
क़ेशम आइलैंड के गवर्नर ने इस बात से इनकार किया कि द्वीप के अंदर कोई धमाका हुआ है, लेकिन उन्होंने माना कि आस-पास आवाज़ें सुनाई दी थीं। वहीं, 11 जून को Persian Gulf Strait Authority ने Strait of Hormuz को बंद करने का ऐलान किया और जहाजों को आगे के निर्देशों का इंतज़ार करने को कहा।
ईरानी मीडिया ने इन आवाज़ों को समुद्र में अमेरिकी और ईरानी सेनाओं के बीच हुई झड़पों से जोड़ा। हालांकि, Institute for the Study of War (ISW) ने इस दावे को अमेरिका पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बनाने की एक कोशिश बताया।
ताज़ा हालात और मौजूदा अपडेट
12 और 13 जून को भी क़ेशम आइलैंड और सिरिक काउंटी के निवासियों ने धमाकों जैसी आवाज़ें सुनीं। शुरुआती अंदाज़ों के मुताबिक, ये आवाज़ें समुद्र में ईरानी सेना द्वारा अनजान या बिना अनुमति वाले जहाजों पर दागे गए चेतावनी वाले शॉट्स हो सकते हैं।
फिलहाल किसी भी आधिकारिक सैन्य या सुरक्षा एजेंसी ने इन धमाकों की सटीक वजह की पुष्टि नहीं की है। लेकिन यह साफ़ है कि Apache हेलीकॉप्टर की घटना के बाद से दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव की स्थिति बनी हुई है।
