ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने की कोशिशों में एक नया मोड़ आया है. ईरान के एक बड़े नेता ने पाकिस्तान की ईमानदारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बीच ईरान ने अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है ताकि समुद्र का रास्ता खुला रहे और क्षेत्रीय दुश्मनी खत्म हो सके.
ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता पर शक क्यों जताया?
ईरान के सांसद Ebrahim Rezaei ने 27 अप्रैल 2026 को कहा कि पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच निष्पक्ष तरीके से काम नहीं कर रहा है. उनका आरोप है कि पाकिस्तान हमेशा US राष्ट्रपति Donald Trump के हितों का ख्याल रखता है और अमेरिका की इच्छा के खिलाफ कुछ नहीं कहता. Rezaei ने कहा कि एक मध्यस्थ को निष्पक्ष होना चाहिए, लेकिन पाकिस्तान ने लेबनान और जमी हुई संपत्ति जैसे मामलों में अमेरिका की गलतियों पर चुप्पी साधी.
ईरान का नया प्रस्ताव क्या है और अमेरिका का जवाब क्या रहा?
ईरान ने पाकिस्तानी बिचौलियों के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भेजा है. इसमें कहा गया है कि सबसे पहले Strait of Hormuz को फिर से खोला जाए और बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म की जाए. इस प्रस्ताव में परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत को बाद के लिए टालने का सुझाव दिया गया है. दूसरी तरफ, राष्ट्रपति Donald Trump ने इस प्रस्ताव को बेहतर तो बताया लेकिन कहा कि यह काफी नहीं है. उन्होंने साफ किया कि अमेरिका तभी मानेंगे जब उनके हितों की रक्षा होगी और ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. व्हाइट हाउस की प्रवक्ता Olivia Wales ने भी कहा कि अमेरिका प्रेस के जरिए बातचीत नहीं करेगा.
डिप्लोमेटिक दौरों और बातचीत की ताजा स्थिति क्या है?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने पाकिस्तान और ओमान का दौरा किया और अब वे रूस में राष्ट्रपति Vladimir Putin से मिलने जा सकते हैं. उन्होंने पाकिस्तान की यात्रा को फलदायी बताया. हालांकि, 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई 21 घंटे की सीधी बातचीत बिना किसी समझौते के खत्म हुई थी. अमेरिका ने अब तक ईरानी बंदरगाहों पर सख्त नाकेबंदी जारी रखी है और CENTCOM ने 38 जहाजों को वापस लौटाया है. अमेरिका का मानना है कि यह नाकेबंदी दबाव बनाने के लिए जरूरी है.