ईरान ने दी अमेरिका को खुली चुनौती, 6 महीने तक जंग के लिए तैयार, सऊदी और कुवैत पर भी मंडराया खतरा
मिडिल ईस्ट में हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक तौर पर ऐलान किया है कि उनका देश अमेरिका और इसराइल के खिलाफ कम से कम छह महीने तक भारी युद्ध लड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस बयान के बाद सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे गल्फ देशों में सुरक्षा को लेकर हलचल तेज हो गई है।
ईरान का दावा और गल्फ देशों की स्थिति
IRGC के प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी ने साफ किया है कि ईरान के पास हथियारों और संसाधनों की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि ईरानी सेना मौजूदा रफ्तार से लंबी लड़ाई जारी रख सकती है। ईरान का दावा है कि उसने अब तक मिडिल ईस्ट में अमेरिकी और इसराइली ठिकानों से जुड़ी 200 से ज्यादा जगहों को निशाना बनाया है।
इस तनाव का सीधा असर अब गल्फ देशों पर भी दिख रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहली बार GCC के सभी छह देशों (कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, ओमान, कतर और यूएई) की तरफ हमले या खतरे देखे गए हैं। सऊदी अरब ने अपनी राजधानी रियाद के पास करीब 15 ड्रोन मार गिराए हैं। वहीं, कुवैत में भी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर पर खतरे की आशंका है, जिसे लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
प्रवासियों और आम लोगों पर क्या होगा असर?
गल्फ में रहने वाले लाखों भारतीय और अन्य प्रवासियों के लिए सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा बन गई है। जानकारों का कहना है कि अगर हमले तेज होते हैं तो पानी और बिजली की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। कुवैत जैसे देश अपने पीने के पानी का 90% हिस्सा डिसालिनेशन प्लांट (समुद्र के पानी को साफ करने वाले प्लांट) से लेते हैं, जो हमलों के लिहाज से काफी संवेदनशील माने जाते हैं।
- अमेरिका का बयान: व्हाइट हाउस का मानना है कि अमेरिका और इसराइल का यह अभियान अगले 4 से 6 हफ्तों में अपने मकसद पूरे कर लेगा।
- महंगी सुरक्षा: सस्ते ड्रोन्स को रोकने के लिए गल्फ देश करोड़ों रुपये की पैट्रियट मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
- एडवाइजरी: कई गल्फ देशों ने तटीय और रिहायशी इलाकों में लोगों को गिरने वाले मलबे या संदिग्ध वस्तुओं से सावधान रहने को कहा है।




