परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी तनाव के बीच ईरान ने एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। ईरान ने पाकिस्तान को जानकारी दी है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम (enriched uranium) का एक हिस्सा किसी तीसरे देश को भेजने के लिए तैयार है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों को पूरा करने और वाशिंगटन के साथ समझौते को बचाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम से ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव कम होने की उम्मीद है।
आखिर ईरान ने यूरेनियम ट्रांसफर करने का फैसला क्यों लिया?
ईरान का यह फैसला उसके पिछले बयानों से बिल्कुल अलग है, जहां उसने पहले यूरेनियम को बाहर भेजने से साफ मना कर दिया था। इसके पीछे के मुख्य कारण और बदलाव इस प्रकार हैं:
- अमेरिका के साथ समझौता: ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों को मानकर एक समझौता करना चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस दिशा में हुई प्रगति को स्वीकार किया है।
- फ्रीज संपत्ति को बहाल करना: इस कदम को एक भरोसेमंद कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिससे रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू हो सके और ईरान की रुकी हुई संपत्ति को वापस पाने का रास्ता साफ हो सके।
- चीन को भेजने का विकल्प: इससे पहले 25 मई 2026 को सऊदी टीवी (Al-Arabiya) ने रिपोर्ट दी थी कि ईरान गारंटी मिलने पर अपना यूरेनियम चीन भेजने पर भी विचार कर रहा था।
- पुराने रुख में बदलाव: 29 मई 2026 को ईरान के एक सांसद इब्राहिम अजीजी ने यूरेनियम को देश से बाहर भेजने को ‘रेड लाइन’ बताया था, लेकिन अब ईरान इस पर तैयार हो गया है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता और बैठक की पूरी कहानी क्या है?
इस बड़े फैसले के पीछे पाकिस्तान एक मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है:
- किर्गिस्तान के बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के गृह मंत्रियों की बैठक के दौरान इस विषय पर चर्चा हुई।
- इस बैठक के इतर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और ईरान के गृह मंत्री एस्कंदर मोमेनी के बीच बातचीत हुई, जिसके बाद ईरान ने इस फैसले की जानकारी दी।
- यह संवर्धित यूरेनियम किस तीसरे देश में जाएगा, इसका फैसला ईरान और पाकिस्तान मिलकर आपसी सहमति से करेंगे।
IAEA की रिपोर्ट और यूरेनियम ट्रांसफर की चुनौतियां
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने पहले बताया था कि ईरान एकमात्र ऐसा गैर-परमाणु हथियार वाला देश है जिसके पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम जमा है। हालांकि, यूरेनियम को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना काफी मुश्किल काम है।
IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी के अनुसार, संवर्धित यूरेनियम के परिवहन में कई तकनीकी चुनौतियां और सुरक्षा जोखिम शामिल होते हैं। इसके साथ ही, IAEA ने पहले ईरानी परमाणु ठिकानों तक पूरी पहुंच न मिलने की बात भी कही थी। अब इस नए कदम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर परमाणु तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान अपना यूरेनियम किस देश को भेजेगा?
ईरान और पाकिस्तान मिलकर आपसी सहमति से किसी तीसरे देश का नाम तय करेंगे जहां इस यूरेनियम को सुरक्षित रूप से ट्रांसफर किया जाएगा।
ईरान ने अचानक यूरेनियम ट्रांसफर करने का फैसला क्यों लिया?
ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शर्तों को पूरा करके वाशिंगटन के साथ ठप पड़ी बातचीत को फिर से शुरू करना चाहता है ताकि उसकी फ्रीज संपत्तियों को वापस पाया जा सके।
इस समझौते में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?
पाकिस्तान इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। किर्गिस्तान में हुई एक बैठक के दौरान पाकिस्तान और ईरान के गृह मंत्रियों के बीच बातचीत के बाद यह सहमति बनी है।
