ईरान ने शुरू किया पुलों का पुनर्निर्माण, अमेरिका और इसराइल के हमलों में हुआ था नुकसान, अधिकारियों ने कहा अब बनेंगे और मजबूत

ईरान में अमेरिका और इसराइल के हमलों से टूटे हुए पुलों को फिर से बनाने का काम तेज़ी से चल रहा है। IRNA न्यूज़ एजेंसी ने जानकारी दी है कि जनता की सुविधा के लिए बनाए गए इन पुलों को हमले के ज़रिए नुकसान पहुँचाया गया था, लेकिन सरकार ने तुरंत मरम्मत का काम शुरू कर दिया है। इस घटना के बाद ईरान ने अपनी बुनियादी सुविधाओं को पहले से ज़्यादा मज़बूत करने का फैसला किया है।

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कौन से पुल हुए थे खराब और कितनी जल्दी हुआ काम

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के अलग-अलग शहरों में कई पुलों को निशाना बनाया गया था। इसमें करज का B1 पुल और काशान का यह्या आबाद रेलवे पुल शामिल थे। इसराइल ने दावा किया था कि उसने तेहरान, करज, तबरीज़ और কোম जैसे शहरों में पुलों के आठ हिस्सों को नष्ट किया है। हालांकि, ईरान ने पुनर्निर्माण के काम में काफी तेज़ी दिखाई, जिससे কোম के पास का एक बड़ा रेलवे पुल हमले के बाद 40 घंटे के भीतर ही दोबारा चालू कर दिया गया था।

ईरानी सरकार का बयान और मौजूदा तनाव की स्थिति

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि नागरिक ढांचों पर हमला करने से ईरानी लोग हार नहीं मानेंगे और हर पुल को पहले से ज़्यादा मज़बूत बनाया जाएगा। वहीं विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने इन हमलों को युद्ध अपराध करार दिया है। इस तनाव के बीच 22 अप्रैल को खबर आई कि अमेरिकी हमले और एक ईरानी जहाज़ को ज़ब्त किए जाने के बाद होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया गया है।

अमेरिका का फैसला और पाकिस्तान की भूमिका

पाकिस्तान की request पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्धविराम (ceasefire) को आगे बढ़ाने का ऐलान किया है। लेकिन इसके बावजूद अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी है। ईरानी अधिकारियों ने ट्रंप के इस फैसले पर संदेह जताया है और कहा है कि उन्होंने इस युद्धविराम की मांग नहीं की थी। साथ ही, ईरान ने अमेरिकी सेना द्वारा एक व्यापारिक जहाज़ पर किए गए हमले को समुद्री डकैती बताया है।