ईरान ने शांति समझौते के लिए अपनी कुछ कड़ी शर्तें यानी “रेड लाइन्स” तय कर दी हैं। इन शर्तों पर बात करने के लिए अमेरिका और पाकिस्तान की मदद से इस्लामाबाद में उच्च-स्तरीय मीटिंग चल रही है। यह सारी बातचीत 8 अप्रैल 2026 को घोषित दो हफ्ते के युद्धविराम के बाद शुरू हुई है।

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ईरान की मुख्य शर्तें क्या हैं

ईरान ने अपनी मांगों को लेकर बहुत सख्त रुख अपनाया है। उसने साफ कर दिया है कि इन शर्तों के बिना वह आगे बढ़ने को तैयार नहीं है। मुख्य मांगों की जानकारी नीचे दी गई तालिका में है:

मुख्य मुद्दा ईरान की मांग/कार्रवाई
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ समुद्री रास्ते पर नियंत्रण और जहाजों से ट्रांजिट शुल्क वसूलना।
जहाजों पर पाबंदी प्रतिदिन केवल 15 जहाजों को अनुमति और तेल के बैरल पर टैक्स।
युद्ध हर्जाना अमेरिका और इज़राइल से हमलों के नुकसान की भरपाई।
फ्रीज़्ड एसेट्स विदेशों और कतर के बैंकों में फंसे लगभग 6 बिलियन डॉलर की रिहाई।
अमेरिकी संपत्ति अमेरिका में जमी अपनी 2.05 बिलियन डॉलर की संपत्ति वापस लेना।
क्षेत्रीय युद्धविराम पूरे क्षेत्र और खासकर लेबनान में हमलों को पूरी तरह रोकना।
अंतर्राष्ट्रीय नियम संयुक्त राष्ट्र और IAEA के प्रस्तावों को वापस लेना।

इस्लामाबाद मीटिंग में क्या चल रहा है

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है। ईरानी दल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ कर रहे हैं। वहीं अमेरिकी दल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, स्टीव विटकोफ और जेरेड कुश्नर शामिल हैं।

ईरानी संसद अध्यक्ष ने साफ कहा कि अगर अमेरिका “अमेरिका फर्स्ट” की सोच के साथ बात करेगा तो समझौता हो सकता है, लेकिन “इज़राइल फर्स्ट” की नीति पर कोई बात नहीं होगी। हालांकि, 11 अप्रैल को अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि अभी तक इन शर्तों पर कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

इस बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोज्तबा खामेनेई ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वह दुश्मन देशों की संपत्ति को जब्त या नष्ट कर सकते हैं। वहीं UAE ने भी खाड़ी देशों में हुए हमलों के लिए ईरान से मुआवजे की मांग की है।