ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में एक बड़ा मोड़ आया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के साथ अपनी बातचीत में परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं करेगा। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने स्पष्ट किया है कि बातचीत का मुख्य उद्देश्य केवल युद्ध को रोकना और समुद्री नाकेबंदी को समाप्त करना है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका है।

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ईरान ने बातचीत से परमाणु कार्यक्रम को बाहर क्यों रखा?

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि वर्तमान वार्ता का ध्यान परमाणु मुद्दे पर नहीं है। ईरान इस समय केवल युद्ध को समाप्त करने, विशेष रूप से लेबनान के मोर्चे पर शांति बहाल करने और अमेरिका द्वारा लगाई गई समुद्री नाकेबंदी को हटाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • शांतिपूर्ण ऊर्जा का अधिकार: ईरान ने स्पष्ट किया है कि एनपीटी (NPT) के सदस्य के रूप में उसके पास शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का पूरा अधिकार है।
  • हथियार बनाने का इरादा नहीं: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि उनका देश परमाणु हथियार बनाने या हासिल करने की कोशिश नहीं कर रहा है।
  • पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता: इस बातचीत को सफल बनाने के लिए पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और कतर का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल लगातार तेहरान का दौरा कर रहा है।

अमेरिका का इस पर क्या रुख है और क्या हैं चुनौतियां?

इस पूरे मामले पर अमेरिका का रुख काफी सख्त है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि बातचीत में थोड़ी प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी कई बड़े मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं। विशेष रूप से ईरान के यूरेनियम कार्यक्रम और हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर दोनों देश आमने-सामने हैं।

  • अमेरिका की चेतावनी: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका ईरान के समृद्ध यूरेनियम के भंडार को वापस हासिल करने की कोशिश करेगा। अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि कूटनीति विफल रहती है, तो अमेरिका के पास अन्य विकल्प भी खुले हैं।
  • वार्ता का विफल होना: संयुक्त राष्ट्र की एनपीटी समीक्षा बैठक भी बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई है, जिसका मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते मतभेद हैं।
  • सैन्य तैयारी की खबरें: अमेरिकी प्रशासन कूटनीतिक कोशिशों के साथ-साथ ईरान पर संभावित सैन्य हमलों की तैयारियां भी कर रहा है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कौन से देश मध्यस्थता कर रहे हैं?

इस महत्वपूर्ण बातचीत में पाकिस्तान और कतर मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख और कतर के प्रतिनिधिमंडल ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया है।

क्या ईरान परमाणु हथियार बनाना चाहता है?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया है कि ईरान का इरादा परमाणु हथियार विकसित करने का नहीं है और वे केवल शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु ऊर्जा का उपयोग करना चाहते हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.