ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरानी सेना यानी इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने कहा था कि ईरानी अधिकारियों ने उनसे संपर्क किया था। ईरान का कहना है कि ट्रंप का यह दावा केवल युद्ध के परिणामों से बचने और अपनी कमजोरी को छिपाने का एक बहाना है। इस बीच खाड़ी देशों में भी सुरक्षा को लेकर हलचल तेज हो गई है क्योंकि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
ट्रंप ने क्या दावा किया था और ईरान ने क्या दिया जवाब?
अमेरिकी नेता डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरानी अधिकारियों ने उनसे सीधे बात की थी और बमबारी रोकने की गुजारिश की थी। इस पर ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसी IRNA और IRGC के जनसंपर्क विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारियों ने साफ किया है कि दोनों पक्षों के बीच ऐसी कोई बातचीत नहीं हुई है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने ट्रंप की धमकियों पर पलटवार करते हुए कहा कि ईरानी बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की बातें उनकी ताकत नहीं बल्कि उनकी हताशा को दिखाती हैं। ईरान किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।
कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
तनाव के बीच खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों की खबरें भी सामने आ रही हैं। IRGC ने दावा किया है कि उसकी वायु सेना और नौसेना ने कुवैत में अली अल सलेम और अहमद अल जाबेर एयर बेस के साथ-साथ बहरीन में शेख ईसा एयर बेस पर बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। इसके अलावा ईरान की सेना ने बहरीन में मौजूद अमेरिकी पांचवें बेड़े पर ड्रोन से हमला करने का दावा किया है। हालांकि अमेरिकी सेना इन दावों के बीच लगातार जवाबी कार्रवाई कर रही है और उसने ईरान में कई जगहों पर हवाई हमले किए हैं जिससे वहां के स्थानीय बुनियादी ढांचे को काफी नुकसान पहुंचा है।
खाड़ी देशों को ईरान की चेतावनी और क्षेत्र पर इसका असर
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा है कि अमेरिका लगातार विरोधाभासी संदेश भेज रहा है। इसके साथ ही ईरान ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों को चेतावनी दी है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल अमेरिकी या इजरायली सेना को ईरान के खिलाफ करने की अनुमति न दें। इस बीच कतर के मध्यस्थों ने अमेरिका से चर्चा के बाद तेहरान का दौरा किया है ताकि स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके। इस तनाव का असर खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों प्रवासियों पर भी पड़ सकता है क्योंकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी अधिकारियों के बीच कोई सीधी बातचीत हुई है?
नहीं, ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और विदेश मंत्रालय ने डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे को पूरी तरह से खारिज कर दिया है और इसे युद्ध के परिणामों से बचने की एक चाल बताया है।
ईरान और अमेरिका के इस ताजा विवाद में खाड़ी देशों की क्या भूमिका है?
ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। साथ ही ईरान ने अपने पड़ोसी खाड़ी देशों को कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी निभाने तथा अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ न होने देने की चेतावनी दी है।
