ईरान ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि Strait of Hormuz को बंद कर दिया गया है। ईरान सरकार का कहना है कि यहाँ से कमर्शियल जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। यह खबर अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक नए समझौते के बाद सामने आई है, जिससे समुद्री रास्तों पर तनाव कम होने की उम्मीद है।

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अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता

बता दें कि 17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने एक समझौते (MoU) पर साइन किए थे। इस 14 पॉइंट वाले समझौते का मकसद दोनों देशों के बीच विवाद को खत्म करना, समुद्री रास्तों को फिर से खोलना और परमाणु कार्यक्रम व प्रतिबंधों जैसे मुद्दों को अगले 60 दिनों में सुलझाना है। ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने भी इस समझौते को अपनी मंजूरी दे दी है।

जहाजों के लिए नए नियम और गाइडलाइन्स

ईरान के Persian Gulf Strait Affairs Authority (PGSA) ने जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के लिए कुछ नए निर्देश जारी किए हैं। अब जहाजों को रास्ता मिलने के लिए इन नियमों का पालन करना होगा:

  • जहाजों को तय इलाके में पहुँचने से कम से कम 48 घंटे पहले PGSA को अपनी रिक्वेस्ट भेजनी होगी।
  • आवेदन के लिए आधिकारिक वेबसाइट PGSA.ir या ईमेल Info@PGSA.ir का इस्तेमाल करना होगा।
  • जहाजों को अपनी पूरी जानकारी और बातचीत के सही जरिए बताने होंगे।

60 दिनों तक नहीं लगेगा कोई शुल्क

समझौते के तहत, ईरान ने अगले 60 दिनों के लिए सुरक्षा, पर्यावरण सेवाओं और ईरानी इंश्योरेंस से जुड़ी सभी फीस माफ कर दी है। इन सबका खर्च अब ईरान सरकार खुद उठाएगी। हालांकि, यह साफ किया गया है कि जहाजों के पास ईरान द्वारा मान्यता प्राप्त इंश्योरेंस होना जरूरी है।

ट्रैफिक में बढ़ोत्तरी और अन्य अपडेट

समुद्री ट्रैकिंग कंपनियों जैसे AXSMarine और MarineTraffic के मुताबिक, 18 जून 2026 को इस रास्ते से 25 जहाजों ने आवाजाही की। यह अप्रैल के बाद का सबसे बड़ा आंकड़ा है। ईरान अब इस रास्ते से सैन्य और तकनीकी रुकावटों को हटाने और डीमाइनिंग (बोरबस्त करना) का काम शुरू करेगा। साथ ही, इस रास्ते के भविष्य के प्रबंधन के लिए ईरान ओमान के साथ बातचीत भी करेगा।

दूसरी तरफ, ईरान के संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान अपनी “रेड लाइन्स” का पालन करेगा और किसी भी अनुचित मांग का कड़ा जवाब दिया जाएगा। वहीं, 19 जून को इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच सीजफायर होने से इस समझौते को और मजबूती मिली है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.