ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बागर गालीबाफ ने एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि जिन परमाणु साइटों पर बमबारी हुई है या जो खराब हो चुकी हैं, वहां किसी भी तरह की जांच नहीं होने दी जाएगी। यह फैसला ईरान के कानून के मुताबिक लिया गया है।
ℹ️: Kuwait: पशुपालकों के लिए जरूरी खबर, चारे का वितरण 12 जुलाई तक बंद, सरकारी सिस्टम में होगा अपग्रेड।
गालीबाफ ने 1 जुलाई 2026 को कहा कि ऐसी जांच की अनुमति किसी भी हाल में नहीं दी जा सकती। उन्होंने बताया कि जांच की अनुमति देने का पूरा अधिकार सिर्फ ईरान की Supreme National Security Council के पास है। ईरान अपनी कानूनी सीमाओं से बाहर जाकर कोई रियायत नहीं देगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगई ने भी इसी बात को दोहराया है। उन्होंने IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी से कहा कि वे राजनीतिक बयान देना बंद करें और केवल अपने तय काम पर ध्यान दें।
दूसरी तरफ, International Atomic Energy Agency (IAEA) का मानना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम की सच्चाई जानने के लिए इन क्षतिग्रस्त जगहों की जांच बहुत जरूरी है।
इस मामले में कुछ समय पहले अमेरिका के अधिकारियों, जिनमें डोनाल्ड ट्रम्प और जेडी वैन्स शामिल थे, ने दावा किया था कि ईरान जांच के लिए मान गया है। लेकिन ईरान के अधिकारियों और उनके संयुक्त राष्ट्र राजदूत अली बहरेनी ने इन दावों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि ऐसी कोई डील या प्रोटोकॉल नहीं बना है।
फिलहाल, ईरान ने केवल बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट और तेहरान रिसर्च रिएक्टर में ही जांच की अनुमति दे रखी है, जो पुराने समझौतों के हिसाब से है।
