ईरान ने साफ़ कर दिया है कि वह किसी भी अस्थायी युद्धविराम (temporary ceasefire) को स्वीकार नहीं करेगा। ईरान की मांग है कि पूरे क्षेत्र में चल रहे सभी झगड़ों को हमेशा के लिए खत्म किया जाए। तुर्की में आयोजित अंताल्या डिप्लोमेसी फोरम में ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री ने इस बात को स्पष्ट किया और अमेरिका व इसराइल को इस अस्थिरता के लिए जिम्मेदार ठहराया।
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ईरान की मुख्य मांगें क्या हैं?
ईरान के डिप्टी विदेश मिनिस्टर Saeed Khatibzadeh ने कहा कि लेबनान से लेकर रेड सी (Red Sea) तक जितने भी युद्ध चल रहे हैं, उन सबका स्थायी समाधान होना चाहिए। उन्होंने इसे अपनी ‘रेड लाइन’ बताया है। ईरान का मानना है कि हिंसा को सिर्फ कुछ समय के लिए रोका नहीं जाना चाहिए, बल्कि इसे पूरी तरह से और हमेशा के लिए खत्म करना जरूरी है।
अमेरिका और इसराइल पर क्या आरोप लगे?
ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इसराइल ने मिलकर इस पूरे इलाके में अस्थिरता पैदा की है। उनका कहना है कि इस वजह से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और दुनिया के आर्थिक सिस्टम पर बुरा असर पड़ा है। इसके अलावा, UN में ईरान के प्रतिनिधि Amir-Saeid Iravani ने अमेरिका द्वारा लगाए गए नेवल ब्लॉकेड (naval blockade) को गैरकानूनी बताया और इसे UN चार्टर का उल्लंघन कहा।
क्षेत्र में वर्तमान स्थिति और मध्यस्थता
इसराइल और लेबनान के बीच 10 दिन का युद्धविराम शुरू हो चुका है, लेकिन हिजबुल्लाह का इस पर क्या रुख रहेगा, यह अभी साफ़ नहीं है। वहीं, पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है। ईरान ने संकेत दिया है कि वह पाकिस्तान, तुर्की, सऊदी अरब, चीन और रूस जैसे देशों के साथ मिलकर व्यापक बातचीत करने के लिए तैयार है।
| संस्था/देश | मुख्य भूमिका/स्थिति |
|---|---|
| ईरान | स्थायी युद्धविराम की मांग और अमेरिका-इसराइल पर आरोप |
| अमेरिका | नेवल ब्लॉकेड लागू किया, मध्यस्थता में शामिल |
| इसराइल | लेबनान के साथ 10 दिन का युद्धविराम शुरू |
| पाकिस्तान | ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश |
| तुर्की | डिप्लोमेसी फोरम की मेजबानी की और बातचीत का सुझाव दिया |
| लेबनान | इसराइल के साथ युद्धविराम प्रभावी हुआ |
| हिजबुल्लाह | ईरानी समर्थित समूह, जिसका रुख अभी अनिश्चित है |
