अमेरिका और ईरान के बीच जमी हुई संपत्ति (frozen assets) को लेकर विवाद बढ़ गया है। ईरान के संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान अपने पैसों से अमेरिकी खेती के उत्पाद खरीदेगा। यह पूरा मामला दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए एक समझौते के बाद सामने आया है।

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दरअसल, 17 जून 2026 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने वर्साय में एक समझौता (MoU) साइन किया था। यह समझौता 18 जून से लागू हो गया और इसके तहत परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों पर बातचीत के लिए 60 दिन का समय तय किया गया। इसी दौरान 22 जून को अमेरिकी ट्रेजरी ने ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल्स के लेनदेन के लिए एक अस्थायी लाइसेंस (GL X) भी जारी किया।

पैसे के इस्तेमाल पर छिड़ी बहस

ईरान के संसदीय स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालीबाफ ने 23 जून को ऐलान किया था कि अमेरिका के साथ $12 बिलियन की जमी हुई संपत्ति को रिलीज करने पर सहमति बनी है। लेकिन इसके बाद दोनों देशों के बीच इस बात को लेकर खींचतान शुरू हो गई कि इस पैसे का इस्तेमाल कैसे होगा।

डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि इस रकम में से शुरुआती $500 मिलियन का इस्तेमाल ईरान केवल अमेरिका से गेहूं, सोयाबीन और मक्का जैसे खेती के उत्पाद खरीदने के लिए करेगा ताकि वहां की भूख की समस्या दूर हो सके। ट्रंप ने साफ कहा कि तेहरान को कोई सीधा कैश नहीं दिया जाएगा। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD वेंस और ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने भी कहा कि इन पैसों की निगरानी अमेरिका और कतर करेंगे ताकि इनका गलत इस्तेमाल न हो।

ईरान का कड़ा जवाब

ईरान ने इन तमाम दावों को गलत बताया है। स्पीकर गालीबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका गलत दावा कर रहा है, जबकि असलियत यह है कि अमेरिका ने दशकों तक अविश्वास की फसल बोई है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई और जिनेवा में ईरान के राजदूत अली बहरैनी ने भी साफ किया कि अपने पैसों का इस्तेमाल कैसे करना है, इसका फैसला सिर्फ ईरान करेगा।

ईरान के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुलनासिर हेम्मती ने कहा कि ईरान अमेरिकी उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर नहीं है, लेकिन अगर सामान की कीमत और क्वालिटी सही रही तो वे खरीदारी कर सकते हैं।

समझौते और पैसों का हिसाब

विवरण जानकारी/राशि
कुल रिलीज होने वाली राशि $12 बिलियन
किस्त (Tranches) $6 बिलियन की दो किस्तें
ट्रंप द्वारा बताया गया शुरुआती हिस्सा $500 मिलियन
बातचीत की समय सीमा 60 दिन
समझौता लागू होने की तारीख 18 जून 2026

समझौते की धारा 11 के मुताबिक, अमेरिका इन जमी हुई रकम को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराएगा और दोनों देश आपसी बातचीत से इसके तौर-तरीके तय करेंगे। फिलहाल दोनों देशों के अधिकारियों के बयानों से यह साफ है कि वे अभी भी एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हैं।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.