ईरान और UAE के बीच Hormuz Strait को लेकर विवाद गहरा गया है। International Maritime Organization (IMO) की मीटिंग में ईरान ने UAE के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि ईरान इस समुद्री रास्ते को बंद कर रहा है। यह विवाद इसलिए अहम है क्योंकि इस रास्ते से दुनिया का बहुत सारा तेल और व्यापार गुजरता है, जिससे Gulf देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम लोगों की जेब पर असर पड़ सकता है।

ईरान और UAE के बीच क्या है मुख्य विवाद?

ईरान ने 13 अप्रैल 2026 को IMO की लीगल कमेटी में एक कानूनी दस्तावेज जमा किया। इसमें ईरान ने कहा कि वह Hormuz Strait को बंद नहीं कर रहा है। ईरान का दावा है कि समुद्र में सुरक्षा की कमी बाहरी देशों की सैन्य हरकतों की वजह से है। ईरान ने यह भी साफ किया कि समुद्री रास्ते के लिए कोई भी नया इंतजाम उसकी सहमति के बिना नहीं हो सकता क्योंकि वह एक तटीय देश है और उसे सुरक्षा का पूरा हक है।

दूसरी तरफ, Abu Dhabi National Oil Company (ADNOC) के CEO Sultan Al Jaber ने ईरान के दावों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि ईरान को इस रास्ते को बंद करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह रास्ता बाधित होता है, तो यह पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा होगा।

IMO और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का क्या रुख है?

मार्च 2026 में हुई IMO काउंसिल की मीटिंग में ईरान की धमकियों और जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की गई थी। UAE ने एक घोषणा पत्र पेश किया था, जिसे 115 से ज्यादा सदस्य देशों ने अपना समर्थन दिया। इस पत्र में मांग की गई थी कि ईरान अंतरराष्ट्रीय नेविगेशन में दखल देना बंद करे और नियमों का पालन करे।

  • Mohamed Khamis Saeed AlKaabi: UAE के प्रतिनिधि ने जोर दिया कि ईरान को अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करना चाहिए।
  • IMO Council: काउंसिल ने माना कि ईरान की हरकतें समुद्री पर्यावरण और नाविकों की जान के लिए गंभीर खतरा हैं।
  • सुरक्षा मांग: दुनिया भर के देशों ने मांग की है कि व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता सुरक्षित और खुला रखा जाए।