संयुक्त राष्ट्र (UN) में ईरान के स्थायी प्रतिनिधि Amir Saeid Iravani ने 15 जुलाई 2026 को अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। ईरान ने स्पष्ट किया कि यमन के हूती आंदोलन को हथियार देने की बात पूरी तरह से गलत है और इसका कोई ठोस सबूत किसी के पास नहीं है। राजदूत इरावानी ने कहा कि ये आरोप सिर्फ राजनीतिक कारणों से लगाए गए हैं।

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अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार

ईरान ने उल्टा अमेरिका को ही यमन और पूरे इलाके में शांति बिगाड़ने का दोषी बताया है। Amir Saeid Iravani ने आरोप लगाया कि अमेरिका के सैन्य ऑपरेशनों ने 2022 के संघर्ष विराम को खराब किया और शांति प्रक्रिया को रोक दिया। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र को दी गई जानकारी में Islamabad Memorandum of Understanding के 42 बार उल्लंघन का दावा किया। ईरान का कहना है कि वे यमन में राजनीतिक बातचीत का समर्थन करते हैं और वहां के अधिकारी अपने फैसले लेने के लिए स्वतंत्र हैं।

बढ़ता तनाव और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

अमेरिकी उप-राजदूत Tammy Bruce ने 14 जुलाई 2026 को ईरान पर हूतियों को सैन्य मदद देने और यूएन के सुरक्षा प्रस्तावों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया था। इस पर चीन के राजदूत Sun Lei ने भी टिप्पणी की और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे क्षेत्र की स्थिति काफी खतरनाक हो गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख Volker Turk ने भी चिंता जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से शुरू हुई यह दुश्मनी आम नागरिकों के लिए बहुत बड़ा झटका है और उन्होंने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। फिलहाल Bahrain, Kuwait और Jordan में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ईरान के पलटवार की खबरें भी सामने आ रही हैं।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.