मिडिल ईस्ट में शांति की कोशिशों के बीच ईरान और अमेरिका के बीच फिर से तकरार शुरू हो गई है. ईरान ने अमेरिका के उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है जिसमें कहा गया था कि ईरान के समर्थक समूह इलाके में अशांति फैला रहे हैं. ईरान का कहना है कि असल में अमेरिकी नीतियां ही इस क्षेत्र में शांति की राह में सबसे बड़ी रुकावट हैं.
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ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने कहा कि मिडिल ईस्ट में जो अस्थिरता है, उसके लिए अमेरिका की कार्रवाई जिम्मेदार है. उन्होंने साफ़ किया कि अमेरिकी नीतियां ही शांति लाने में बाधा बन रही हैं. यह विवाद उस समय बढ़ा जब अमेरिका ने इराक और लेबनान में ईरान के समर्थक समूहों पर आरोप लगाए.
समझौते के बाद भी जारी है विवाद
बता दें कि जून 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता (MOU) हुआ था. इस समझौते के तहत दोनों देशों ने सैन्य टकराव खत्म करने और 60 दिनों तक बातचीत करने का फैसला किया था. अमेरिका ने ईरान पर से कुछ प्रतिबंध हटाए थे ताकि ईरान अपने कच्चे तेल की बिक्री कर सके. हालांकि, इस समझौते के बाद भी कई मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं.
परमाणु जांच और Strait of Hormuz पर टकराव
परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी दोनों देशों के बयानों में बड़ा अंतर दिखा. राष्ट्रपति Trump ने दावा किया कि ईरान भविष्य में परमाणु जांच के लिए पूरी तरह सहमत हो गया है. लेकिन Esmaeil Baghaei ने इन दावों को गलत बताया और कहा कि ईरान उन संवेदनशील साइटों पर जांच की अनुमति नहीं देगा जिन्हें 2025 में अमेरिका और इसराइल ने बमबारी से तबाह कर दिया था.
साथ ही, Strait of Hormuz की सुरक्षा को लेकर भी बहस जारी है. ईरान ने खुद को इस जलमार्ग का संरक्षक बताया है और किसी भी बाहरी देश, खासकर अमेरिका की भूमिका को वहां स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.
खाड़ी देशों का दौरा और क्षेत्रीय प्रभाव
अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने कुवैत और UAE का दौरा किया ताकि इस समझौते और क्षेत्रीय स्थिरता पर चर्चा की जा सके. उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने खाड़ी सहयोगियों के साथ पूरी तरह तालमेल बनाकर चलेगा. दूसरी ओर, ईरान की बातचीत टीम के प्रमुख Mohammad Bagher Ghalibaf ने इस समझौते को अमेरिका की हार बताया और कहा कि मिडिल ईस्ट की सुरक्षा का फैसला सिर्फ क्षेत्रीय देशों को ही करना चाहिए.
- MOU का असर: सैन्य टकराव खत्म करने के लिए 60 दिन की बातचीत तय हुई.
- तेल व्यापार: अमेरिका ने ईरान के लिए तेल बिक्री के रास्ते खोले.
- IAEA की भूमिका: परमाणु गतिविधियों की निगरानी IAEA करेगा, लेकिन जांच के समय पर विवाद है.
- इसराइल की चिंता: इसराइल इस समझौते की शर्तों से परेशान है क्योंकि वह इसमें शामिल नहीं है.
