हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका और ईरान आमने-सामने, जानिए क्या है पूरा मामला.

खाड़ी देशों में तनाव उस वक्त और बढ़ गया जब अमेरिका और ईरान के बीच जुबानी जंग तेज हो गई। 23 अगस्त 2026 को ईरान के कार्यवाहक रक्षा प्रमुख ब्रिगेडियर जनरल सैयद माजिद इब्न अल-रेजा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को सीधे तौर पर खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को अमेरिकी इलाका बताया था। इस बयानबाजी ने क्षेत्रीय सुरक्षा और तेल व्यापार को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
डोनाल्ड ट्रंप का दावा और ईरान का तीखा जवाब
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि वह रणनीतिक जलमार्ग को अमेरिकी क्षेत्र मानते हैं और इस पूरे क्षेत्र पर उनका पूरा नियंत्रण है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया था कि ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरानी रक्षा प्रमुख इब्न अल-रेजा ने कहा कि ट्रंप बहुत ज्यादा बातें करते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान आर्थिक प्रतिबंधों और धमकियों का सामना करने के लिए अपने देश के युवाओं और स्थानीय ज्ञान पर पूरी तरह भरोसा करता है। रक्षा मंत्री ने यह बातें एक भूमिगत मिसाइल उत्पादन सुविधा के दौरे के दौरान कहीं, जिसका वीडियो हाल ही में देश की रक्षा क्षमताओं को दिखाने के लिए जारी किया गया था।
समझौता टूटने के बाद बढ़ा तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच एक समझौता ज्ञापन यानी एमओयू टूटने के बाद हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास का माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने पिछले जून में हुए समझौते का बचाव किया था। इस समझौते में संघर्ष को खत्म करने और परमाणु समझौते पर पहुंचने के लिए 60 दिन का समय तय किया गया था। हालांकि ऐसी रिपोर्ट्स सामने आईं कि पिछले हफ्ते दोनों पक्षों ने इस डील को छोड़ दिया, फिर भी ईरानी राष्ट्रपति ने इसे देश के सम्मान और राष्ट्रीय हित से जुड़ा रास्ता बताया था।
मंगलवार को अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने इस जलमार्ग के रास्ते 1.5 करोड़ से ज्यादा बैरल तेल ले जाने में मदद की है। इसके बावजूद ईरान ने बगदाद के अनुरोध पर कुछ इराकी टैंकरों को इस रास्ते से गुजरने की अनुमति दी है। खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए इस तरह के तनाव अक्सर चिंता का विषय बन जाते हैं क्योंकि इससे तेल की कीमतों और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
ईरान के अन्य अधिकारियों की चेतावनी
ईरान के दूसरे बड़े अधिकारियों ने भी अमेरिका के रुख का खुलकर विरोध किया है। कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप विदेश मंत्री काज़म गरीबाबादी ने 15 और 17 अगस्त 2026 को कहा था कि यह जलमार्ग हमेशा से ईरान का रहा है, ईरान का है और आगे भी ईरान का ही रहेगा। उन्होंने साफ किया कि इसे सोशल मीडिया पोस्ट या सैन्य ताकत के दम पर कोई नहीं छीन सकता है। इसके अलावा सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रजाई ने 23 अगस्त को चेतावनी दी कि जो भी देश अमेरिका के आर्थिक अभियान में उसका साथ देगा, उसे दुश्मन माना जाएगा। रजाई ने कहा कि अगर क्षेत्रीय पड़ोसी वाशिंगटन की आर्थिक नीतियों का समर्थन करेंगे तो ईरान उनके हितों को नुकसान पहुंचा सकता है और तेल के निर्यात को भी रोक सकता है।