तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह की सैन्य धमकी या समय सीमा के दबाव में आकर युद्धविराम पर बातचीत नहीं करेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने सोमवार को कहा कि ईरान ने अपनी स्थिति और मांगें स्पष्ट कर दी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि बातचीत के लिए सही माहौल जरूरी है और युद्ध अपराधों की धमकी के बीच समझौते मुमकिन नहीं हैं। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई की चेतावनी के बीच ईरान का यह बयान काफी गंभीर माना जा रहा है।

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युद्धविराम को लेकर ईरान की क्या है नई शर्तें?

ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, उन्होंने मध्यस्थों के माध्यम से अपने राष्ट्रीय हितों पर आधारित मांगें पहले ही भेज दी हैं। ईरान का कहना है कि उनकी बातचीत को लेकर दी गई ढील को उनकी कमजोरी न समझा जाए। पाकिस्तान ने एक शांति समझौता तैयार किया है, जिसे लेकर बातचीत चल रही है।

  • ईरान फिलहाल पाकिस्तान द्वारा दिए गए तुरंत युद्धविराम के प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है।
  • ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि केवल अस्थायी शांति के लिए Strait of Hormuz को नहीं खोला जाएगा।
  • ईरान का मानना है कि अमेरिका स्थायी शांति के लिए अभी पूरी तरह तैयार नहीं है।
  • ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि अगर उनके नागरिक ठिकानों पर हमला हुआ, तो वे बहुत विनाशकारी पलटवार करेंगे।

खाड़ी देशों और प्रवासियों पर इसका क्या होगा असर?

क्षेत्र में जारी इस तनाव का सीधा असर कुवैत, सऊदी और यूएई जैसे देशों पर भी दिख रहा है। हाल के हमलों में कुवैत के तेल मुख्यालय और बिजली संयंत्रों को नुकसान पहुंचा है, जिससे वहां रह रहे प्रवासियों में चिंता है। भारत से आने-जाने वाली उड़ानों और समुद्री व्यापार के लिए भी यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

प्रमुख पक्ष ताजा स्थिति और घटनाक्रम
United States मंगलवार शाम तक Strait of Hormuz खोलने की आखिरी डेडलाइन दी।
Israel तेहरान में हवाई हमले किए, जिसमें करीब 25 लोगों के मारे जाने की खबर है।
Kuwait ईरानी हमलों के कारण रिहायशी इलाकों में लोग घायल हुए और बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ।
Pakistan दो चरणों वाले शांति समझौते पर मध्यस्थता कर रहा है ताकि 45 दिन का युद्धविराम हो सके।

ईरान के Revolutionary Guard ने अपने इंटेलिजेंस चीफ Maj. Gen. Majid Khademi की मौत की भी पुष्टि की है। जानकारों का कहना है कि अगर अगले 48 घंटों में कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो सैन्य टकराव और बढ़ सकता है। पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश लगातार स्थिति को शांत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।