बहरीन के मनामा में अमेरिका की अगुवाई में एक बड़ी सुरक्षा बैठक हुई। इसमें कतर समेत करीब 11 से 12 मिडिल ईस्ट देशों के सैन्य अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक का मकसद इलाके में शांति बनाए रखना और व्यापारिक जहाजों के लिए रास्ता खुला रखना था। लेकिन ईरान ने इस पूरी बैठक को सिरे से खारिज कर दिया है।
1 जुलाई 2026 को US Central Command (CENTCOM) ने इस सुरक्षा संवाद का आयोजन किया। इस कॉन्फ्रेंस में पहली बार सीरिया और लेबनान के सैन्य अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया। CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने कहा कि सभी देश इलाके की सुरक्षा और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। बैठक में मुख्य रूप से Strait of Hormuz से होने वाले व्यापार को बिना किसी रुकावट के चलाने पर चर्चा हुई।
2 जुलाई 2026 को ईरान ने इस समिट का कड़ा विरोध किया। ईरान के डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर काज़ेम ग़रीबाबदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि हॉर्मुज़ का रास्ता ईरान के कमांड में है न कि CENTCOM के। उन्होंने यह भी कहा कि बहरीन में हुई इस बैठक से फारस की खाड़ी में कोई कानूनी व्यवस्था या सुरक्षा स्थापित नहीं की जा सकती।
ईरान का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा का मामला पड़ोसी देशों को आपस में मिलकर सुलझाना चाहिए। इसमें अमेरिका की सेना का हस्तक्षेप या उनकी छत्रछाया नहीं होनी चाहिए। इसके अलावा, ईरान के Khatam Al Anbiya Central Headquarters ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में दखल देने की कोशिश की, तो इसका जवाब बहुत सख्त और निर्णायक होगा। ईरान का कहना है कि यह रणनीतिक जलमार्ग पूरी तरह से उनके अधिकार में है।
