ईरान के सुप्रीम लीडर के भारत में प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने रविवार को पाकिस्तान के दावों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पश्चिमी एशिया में चल रहे संघर्ष को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की कोई भूमिका नहीं है। पाकिस्तान की ओर से किए गए ये दावे कि वे ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत करवा रहे हैं, पूरी तरह से गलत हैं। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि शांति वार्ता को लेकर पाकिस्तान के साथ उनकी कोई चर्चा नहीं हुई है।

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पाकिस्तान के दावों की सच्चाई और ईरान का जवाब

ईरान के प्रतिनिधि अब्दुल माजिद हकीम इलाही ने बताया कि पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार का शांति पहल वाला दावा सच नहीं है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ऐसे दावे इसलिए कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों को प्रभावित किया जा सके। ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी तरह की मध्यस्थता के लिए पाकिस्तान का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। ईरान ने स्पष्ट किया कि इस्लामाबाद के पास इस युद्ध को खत्म कराने का कोई जरिया या भूमिका नहीं है।

भारत की भूमिका और वर्तमान संघर्ष पर महत्वपूर्ण जानकारी

ईरान ने भारत की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि वह इस संकट को हल करने में बहुत अच्छी भूमिका निभा सकता है। प्रतिनिधि ने यह भी बताया कि इस संघर्ष की वजह अमेरिका और इजरायल की नीतियां हैं। इस स्थिति से जुड़ी कुछ मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

मुख्य बिंदु विवरण
पाकिस्तान का दावा पाकिस्तान ने 15-सूत्रीय शांति योजना का दावा किया था जिसे ईरान ने खारिज कर दिया।
भारत का योगदान ईरान के अनुसार भारत शांति बहाली में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
हमले का आरोप ईरान ने कहा कि 28 फरवरी को नागरिक सुविधाओं पर हमले किए गए थे।
परमाणु हथियार धार्मिक आदेश के कारण ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने के अपने फैसले पर कायम है।

इलाही ने आगे कहा कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे जैसे अस्पताल और स्कूलों को निशाना बनाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी देशों को इस संघर्ष को समाप्त करने के लिए सकारात्मक रूप से आगे आना चाहिए। ईरान अपनी रक्षा करने के लिए तैयार है लेकिन वह परमाणु हथियारों के इस्तेमाल के खिलाफ है क्योंकि वहां के धार्मिक आदेश में इसकी मनाही है।