ईरान में अमेरिका और इसराइल के हवाई हमलों के बाद मची तबाही के बीच बचाव कुत्तों की वीरता की चर्चा हो रही है. सोशल मीडिया पर इन कुत्तों की जमकर तारीफ की जा रही है क्योंकि इन्होंने मलबे में दबे सैकड़ों लोगों की जान बचाने में मदद की. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, इन कुत्तों ने मुश्किल हालातों में खोज अभियान चलाकर कई लोगों को नया जीवन दिया.

ईरान के बचाव कुत्तों ने कैसे की मदद

ईरान के रेड क्रीसेंट सोसाइटी ने मलबे से लोगों को निकालने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित स्निफर कुत्तों की टीम तैनात की. ये कुत्ते अपनी सूंघने की शक्ति से उन लोगों का पता लगाने में कामयाब रहे जो भारी मलबे के नीचे दबे हुए थे. मार्च के अंत से शुरू हुए हमलों में सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों घायल हुए, जिसमें इन कुत्तों की भूमिका बहुत अहम रही.

अंतरराष्ट्रीय मदद और अन्य घटनाक्रम

इस संकट के दौरान अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने भी ईरान का साथ दिया. IFRC ने तुर्की से जरूरी मेडिकल सामान ईरान भेजा ताकि घायलों का इलाज हो सके. वहीं ICRC भी मानवीय सहायता बढ़ाने के लिए ईरान के रेड क्रीसेंट सोसाइटी के साथ काम कर रहा है. अप्रैल के महीने में कई जगह हवाई हमले हुए, जिसके बाद बचाव अभियान को और तेज कर दिया गया.

ईरान में कुत्तों को लेकर क्या हैं नियम

भले ही बचाव कार्यों में कुत्तों की तारीफ हो रही है, लेकिन ईरान में पालतू कुत्तों को लेकर कुछ कड़े नियम हैं. कुछ शहरों में कुत्तों को बाहर घुमाने पर पाबंदी है और इसे पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव माना जाता है. हालांकि, शिकार, रखवाली और बचाव जैसे जरूरी कामों के लिए कुत्तों के इस्तेमाल की अनुमति है और सरकार ने पहले ऐसे बचाव कर्मियों की तारीफ भी की है.

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.