दुनिया की राजनीति में एक बड़ा बदलाव दिख रहा है। ईरान की मजबूती ने अमेरिका के अकेले दबदबे को चुनौती दी है। अब दुनिया के बड़े देशों के बीच ताकत का संतुलन बदल रहा है, जिससे पूरी दुनिया की नजरें इस खबर पर टिकी हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच क्या चल रहा है?
IRNA न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक ईरान के अडिग रहने से अब अमेरिका की एकतरफा ताकत कम हो रही है। इस मामले में कुछ अहम बातें सामने आई हैं:
- पाकिस्तान की भूमिका: 8 अप्रैल को पाकिस्तान की मदद से एक सीज़फायर हुआ था, जिससे अमेरिका और इसराइल के हमले रुके थे।
- जवाब की तैयारी: ईरान ने 10 मई 2026 को अमेरिका के प्रस्ताव पर अपना जवाब पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए भेज दिया था।
- ईरान का रुख: राष्ट्रपति Pezeshkian ने कहा कि ईरान पूरी गरिमा और ताकत के साथ बातचीत में शामिल हुआ है।
- कड़ा संदेश: ईरान के एक टॉप कमांडर ने अमेरिका और उसके साथियों को चेतावनी दी है कि वे कोई गलत रणनीतिक कदम न उठाएं।
विशेषज्ञों की राय और दुनिया पर असर
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका अब पहले जैसा ताकतवर नहीं रहा। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर Šarūnas Liekis ने कहा कि अमेरिका एक कमजोर होता हुआ पावर है और वह ईरान में शासन बदलने का अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर पाया।
- चीन और रूस का फायदा: जानकारों का कहना है कि इस स्थिति से चीन और रूस को फायदा मिल सकता है। खासकर चीन का CIPS सिस्टम ऊर्जा व्यापार का मुख्य जरिया बन सकता है।
- शांति की कोशिशें: भविष्य में शांति लाने के लिए ओमान, कतर और तुर्किये जैसे देश मदद कर सकते हैं।
- अमेरिकी दबाव: कुछ विश्लेषकों का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप को ईरान से ‘जीरो-एनरिचमेंट’ की पुरानी मांग अब छोड़ देनी चाहिए।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में कौन मध्यस्थता कर रहा है?
इस बातचीत में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसने 8 अप्रैल को सीज़फायर कराया और 10 मई को ईरान का जवाब अमेरिका तक पहुँचाया।
चीन को इस स्थिति से क्या फायदा हो सकता है?
जानकारों के अनुसार, चीन का क्रॉस-बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम (CIPS) आने वाले समय में ऊर्जा व्यापार के लिए मुख्य माध्यम बन सकता है।
