ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है। ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव का जवाब पाकिस्तान के ज़रिए भेज दिया है। राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने साफ कर दिया है कि बातचीत करने का मतलब झुकना या सरेंडर करना नहीं है। लेकिन साथ ही ईरान ने यह चेतावनी भी दी है कि अब उसकी बर्दाश्त करने की हद खत्म हो चुकी है।

ईरान ने अमेरिका को क्या जवाब दिया और पाकिस्तान का क्या रोल है?

ईरान ने 10 मई 2026 को पाकिस्तान की मदद से अमेरिका के शांति प्रस्ताव पर अपना जवाब भेजा। state-run IRNA न्यूज़ एजेंसी ने इस बात की पुष्टि की है। अभी बातचीत का मुख्य मकसद इलाके में चल रही लड़ाई और दुश्मनी को रोकना है। दोनों देश एक अस्थायी समझौते (MOU) पर बात कर रहे हैं ताकि Strait of Hormuz से जहाजों का आना-जाना बिना किसी डर के चलता रहे। ईरान के परमाणु कार्यक्रम जैसे बड़े मुद्दों पर बात बाद में होगी।

क्या ईरान अब अमेरिका पर हमला करेगा?

शांति की बात तो चल रही है, लेकिन ईरान के तेवर अब भी सख्त हैं। संसद की विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रवक्ता Ebrahim Rezaei ने कहा कि अब ईरान का सब्र खत्म हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरानी जहाजों पर कोई हमला हुआ, तो इसका जवाब बहुत भारी और निर्णायक होगा। उन्होंने साफ कहा कि अब अमेरिका के जहाजों और सैन्य अड्डों पर हमला हो सकता है और उनके लिए समय तेजी से निकल रहा है।

पाकिस्तान पर भरोसा करना कितना सही है?

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक बिचौलिए की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, भारत के पूर्व डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर Arvind Gupta ने इस पर शक जताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान को एक निष्पक्ष बिचौलिया मानना सही नहीं है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान ने अमेरिका को अपना जवाब कैसे भेजा?

ईरान ने 10 मई 2026 को पाकिस्तान के ज़रिए अपना जवाब अमेरिका को भेजा है, जिसकी पुष्टि IRNA न्यूज़ एजेंसी ने की है।

इस समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?

इसका मुख्य उद्देश्य इलाके में युद्ध रोकना और Strait of Hormuz में समुद्री रास्तों को सुरक्षित बनाना है ताकि ट्रैफिक बिना किसी रुकावट के चलता रहे।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.