ईरान के आम लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। वहां की करेंसी रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। काले बाजार में अब 1 डॉलर की कीमत 18 लाख रियाल हो गई है, जिससे देश में महंगाई का खतरा और बढ़ गया है।

रियाल की कीमत में इतनी गिरावट क्यों आई?

अमेरिकी सरकार ने ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 25 अप्रैल 2026 को अमेरिका ने ईरान की ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़ी 40 शिपिंग कंपनियों और तेल टैंकरों पर प्रतिबंध लगाए। इसके साथ ही चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल रिफाइनरी पर भी पाबंदी लगाई गई है, जो ईरान से कच्चा तेल खरीदती थी। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा है कि इन पाबंदियों से उन पैसों को रोका जाएगा जिनका इस्तेमाल ईरान मध्य पूर्व में अस्थिरता फैलाने के लिए करता है।

विवरण जानकारी
ताजा रेट (काला बाजार) 18 लाख रियाल प्रति डॉलर
पुराना रेट (युद्ध से पहले) 17 लाख रियाल प्रति डॉलर
रिकॉर्ड गिरावट की तारीख 29 अप्रैल 2026
जीडीपी में अनुमानित गिरावट (IMF) 6.1%
प्रतिबंधित शिपिंग कंपनियां 40 कंपनियां और तेल टैंकर
मुद्रा सुधार योजना रियाल से 4 शून्य हटाना
प्रतिबंधित रिफाइनरी चीन की हेंगली पेट्रोकेमिकल

आम जनता और देश की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा?

करेंसी की कीमत गिरने से ईरान में महंगाई बहुत ज्यादा बढ़ सकती है। दवाइयां, खाने-पीने का सामान और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी चीजें बाहर से मंगाई जाती हैं, इसलिए इनकी कीमतें डॉलर के भाव के साथ बढ़ेंगी। IMF ने चेतावनी दी है कि 2026 में ईरान की जीडीपी 6.1% तक घट सकती है, जो दुनिया में सबसे बड़ी गिरावट है।

हालात को संभालने के लिए ईरान की संसद ने अक्टूबर 2025 में रियाल से चार शून्य हटाने की योजना को मंजूरी दी थी। इस तैयारी के लिए दो साल का समय और तीन साल का ट्रांजिशन पीरियड रखा गया है। वहीं, 27 अप्रैल 2026 को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची रूस पहुंचे ताकि मध्य पूर्व के तनाव और इसराइल-अमेरिका संघर्ष पर चर्चा की जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान की मुद्रा रियाल में इतनी गिरावट क्यों आई?

अमेरिकी प्रतिबंधों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा है, जिससे रियाल की कीमत गिरी है।

IMF ने ईरान की अर्थव्यवस्था के बारे में क्या चेतावनी दी है?

IMF के मुताबिक 2026 में ईरान की जीडीपी 6.1% तक सिकुड़ सकती है, जो वैश्विक स्तर पर सबसे नकारात्मक बदलाव है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com