Iran Sanctions: ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों से दुनिया में छिड़ सकता है बड़ा आर्थिक युद्ध, इसराइल ने दी चेतावनी

ईरान के खिलाफ चल रहे आर्थिक अभियान को लेकर इसराइल के अखबार Yedioth Ahronoth ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान पर शिकंजा कसने के लिए शुरू किया गया यह अभियान दुनिया भर में एक बड़े आर्थिक संघर्ष का रूप ले सकता है, जिससे अलग-अलग देश एक-दूसरे के आमने-सामने आ सकते हैं। इस स्थिति का असर खाड़ी देशों और वहां रहने वाले प्रवासियों पर भी पड़ सकता है।
Operation Economic Outcast की शुरुआत
अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर 25 अगस्त 2026 को Operation Economic Outcast की शुरुआत की है। इस अभियान की कमान ट्रेजरी सचिव Scott Bessent के हाथ में है, जिसका मुख्य मकसद ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था से पूरी तरह अलग करना है। इस नए अभियान के तहत ईरान के डिजिटल एसेट्स, सोना, एविएशन, टेक्नोलॉजी और शिपिंग सेक्टर पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि जो भी व्यक्ति या संस्था तेहरान के लिए मनी लॉन्ड्रिंग में मदद करेगी, उसे अमेरिकी डॉलर सिस्टम से बाहर कर दिया जाएगा।
ईरान और खाड़ी देशों की प्रतिक्रिया
अमेरिका के इन कड़े कदमों का जवाब देते हुए ईरान के अर्थव्यवस्था मंत्री Ali Madanizadeh ने 25 अगस्त को कहा कि उनका देश इन सभी हालात से निपटने के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहा है और वह पूरी तरह तैयार है। इससे पहले 24 अगस्त को ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव Mohsen Rezaei ने धमकी दी थी कि अगर यह आर्थिक युद्ध जारी रहा, तो फारस की खाड़ी यानी Persian Gulf से तेल की एक भी बूंद बाहर नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने अमेरिकी अभियान के समर्थन को युद्ध की कार्रवाई बताया।
इसी तनाव के बीच, UKMTO यानी यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने रिपोर्ट दी कि ओमान के तट के पास हॉर्मूज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz के पास एक अज्ञात गोले ने तेल टैंकर को निशाना बनाया। इस घटना में टैंकर को नुकसान पहुंचा लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं मिली। दूसरी ओर, चीन जो कि ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार है, ने वैश्विक वित्तीय स्थिरता को बचाने के लिए तनाव को कम करने की अपील की है। वहीं, संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE जैसे प्रमुख व्यापारिक साझेदारों ने ईरान के साथ अपने सभी तरह के लेन-देन बंद कर दिए हैं। इसराइल के इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल Security Studies के विश्लेषक Raz Zimmt का कहना है कि भारी दबाव के बाद भी ईरान अमेरिकी रणनीति के आगे झुकने को तैयार नहीं है।