सऊदी अरब और ईरान के विदेश मंत्रियों ने एक बार फिर फोन पर बातचीत की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान से संपर्क किया। इस बातचीत का मुख्य मकसद इलाके में शांति बनाए रखना और चल रही कूटनीतिक हलचलों पर चर्चा करना था।

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खाड़ी देशों की सुरक्षा और तनाव पर क्या हुई चर्चा?

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने हाल ही में UAE, कतर और कुवैत के इलाकों और समुद्री क्षेत्रों पर हुए हमलों की कड़ी निंदा की थी। सऊदी सरकार ने मांग की कि इन हमलों को तुरंत रोका जाए। साथ ही, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने या अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में रुकावट डालने की किसी भी कोशिश का विरोध किया गया है। सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत समुद्री रास्तों की सुरक्षा को जरूरी बताया है।

ईरान और अमेरिका के बीच कूटनीति का क्या हाल है?

इस फोन कॉल के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत पर भी चर्चा हुई। खबरों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के एक प्रस्ताव का जवाब भेजा था, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया। ईरान की मांग है कि लेबनान जैसे क्षेत्रीय संघर्ष खत्म हों और प्रतिबंधों में राहत मिले। ईरान ने यह भी प्रस्ताव दिया कि जैसे-जैसे अमेरिकी नाकेबंदी हटेगी, हॉर्मुज जलडमरूमध्य को धीरे-धीरे खोला जा सकता है।

पिछली मुलाकातों और बयानों का असर

बता दें कि इससे पहले 6 मई 2026 को भी दोनों विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बात हुई थी। उस समय भी क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता पर चर्चा की गई थी। वहीं ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा कि जो जीत मैदान में मिली है, उसे कूटनीति के जरिए मजबूत करना जरूरी है। सऊदी अरब ने एक बार फिर साफ किया है कि वह प्रभावित खाड़ी देशों के साथ खड़ा है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करता है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

सऊदी और ईरान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर किन मुद्दों पर बात की?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सऊदी के प्रिंस फैसल बिन फरहान ने क्षेत्रीय सुरक्षा, स्थिरता और ईरान तथा अमेरिका के बीच चल रही कूटनीतिक प्रक्रियाओं पर चर्चा की।

सऊदी अरब ने किन देशों के साथ एकजुटता दिखाई है?

सऊदी अरब ने UAE, कतर और कुवैत के खिलाफ हुए हमलों की निंदा की है और इन देशों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की है।