Iran News: ईरान का बड़ा दावा, देश में ज़मीनी हमला नाकाम किया, अमेरिका को दी वैश्विक स्तर पर परिणाम भुगतने की चेतावनी।

ईरान की संसद के राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के अध्यक्ष Ebrahim Azizi ने 13 अगस्त 2026 को एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना और स्थानीय बलों ने देश के खिलाफ योजनाबद्ध ज़मीनी हमले को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया है। इस दौरान उन्होंने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान की सुरक्षा को आगे भी कोई खतरा पैदा किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम दुनिया भर में अमेरिका के हितों को भुगतने पड़ेंगे। उनका यह भी कहना था कि ईरान में राजनीतिक उथल-पुथल या देश को विभाजित करने की अमेरिकी कोशिशें पूरी तरह विफल हो चुकी हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ा
ईरान के इन बयानों से पहले IRGC के जनरल Mohammad Sardar Nakdi ने भी बयान दिया था कि ईरानी सशस्त्र बलों को आक्रामक रुख पर रखा गया है। इसके अलावा बॉर्डर गार्ड्स के कमांडर ब्रिगेडियर जनरल Ali Akbar Javidan ने अमेरिका की संभावित ज़मीनी कार्रवाइयों को महज एक भ्रम बताया और कहा कि ईरान की सीमाएं पूरी तरह सुरक्षित और अभेद्य हैं। यह बयानबाज़ी ऐसे समय में सामने आई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री संकट काफी गहराता जा रहा है।
समुद्री मार्ग पर नियंत्रण को लेकर टकराव
हाल ही में अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने इस जलमार्ग पर पूर्ण नौसैनिक नियंत्रण होने का दावा किया था और अमेरिकी उपस्थिति को एक मजबूत स्टील की दीवार बताया था। वहीं दूसरी ओर, ईरान के सुरक्षा सूत्रों का साफ कहना है कि इस जलडमरूमध्य का प्रबंधन तेहरान के पास ही है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड CentCom की रिपोर्ट के मुताबिक, उनके नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से 59 कमर्शियल जहाजों का रास्ता बदला गया है, 3 जहाजों को निष्क्रिय किया गया है और ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने की कोशिश कर रहे 2 जहाजों पर बोर्डिंग की गई है।
ट्रांजिट फीस को लेकर नया विवाद
बढ़ते तनाव के बीच ईरानी सांसद Ebrahim Azizi ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर ट्रांजिट फीस वसूलने से जुड़ा एक नया कानून प्रस्तावित किया है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी के प्रमुख Arsenio Dominguez ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के शुल्क का कोई भी कानूनी आधार नहीं बनता है। इस स्थिति पर खाड़ी देशों और यात्रा करने वाले लोगों की भी गहरी नज़र बनी हुई है क्योंकि इसका असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नौवहन पर पड़ रहा है।