ईरान में फंसे 1862 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया, आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते हो रही वतन वापसी.
पश्चिम एशिया के बदलते हालातों के बीच ईरान में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भारत सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। अब तक 1,862 भारतीय नागरिकों को ईरान से निकालकर सुरक्षित रास्तों के जरिए भारत भेजने का काम पूरा हो चुका है। विदेश मंत्रालय (MEA) इस पूरी प्रक्रिया पर बारीकी से नजर रख रहा है ताकि वहां रह रहे हर एक प्रवासी की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित की जा सके।
अब तक कितने भारतीयों की हुई वापसी और इसमें कौन शामिल हैं?
विदेश मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव असीम आर महाजन ने बताया कि 7 अप्रैल 2026 तक कुल 1,862 भारतीयों को ईरान से निकालने में मदद मिली है। पिछले 24 घंटों के भीतर ही बचाव कार्य में तेजी आई और सुरक्षित निकाले गए लोगों की संख्या 1,777 से बढ़कर 1,862 हो गई। निकाले गए लोगों का विवरण इस प्रकार है:
| वर्ग | संख्या |
|---|---|
| कुल भारतीय नागरिक | 1,862 |
| भारतीय छात्र | 935 |
| भारतीय मछुआरे | 472 |
| भारतीय नाविक (खाड़ी क्षेत्र) | 1,599 |
इनमें से 472 मछुआरों का जत्था 4 अप्रैल 2026 को ही आर्मेनिया के रास्ते चेन्नई पहुंच गया था। सरकार ने साफ किया है कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
सुरक्षित निकासी के लिए किन रास्तों का किया गया इस्तेमाल?
पश्चिम एशिया में तनाव की वजह से ईरान का हवाई क्षेत्र बंद है और उड़ानों पर कई तरह की पाबंदियां लगी हैं। ऐसे में भारत सरकार ने अपने नागरिकों को निकालने के लिए सड़क मार्ग का सहारा लिया। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए गए:
- भारतीयों को बस और अन्य वाहनों के जरिए ईरान की जमीनी सीमा पार कराकर आर्मेनिया और अजरबैजान लाया गया।
- वहां से इन नागरिकों को हवाई जहाज के जरिए भारत भेजा गया।
- विदेश मंत्री S. Jaishankar ने इस पूरे मिशन में मदद के लिए आर्मेनिया सरकार का शुक्रिया अदा किया है।
- खाड़ी क्षेत्र में फंसे 1,599 नाविकों को भी अलग से सुरक्षित वापस लाया गया है।
- विदेश मंत्रालय ने प्रवासियों की मदद के लिए चौबीसों घंटे चलने वाले हेल्पलाइन नंबर और स्पेशल कंट्रोल रूम सक्रिय रखे हैं।
भारतीय दूतावास लगातार वहां रह रहे लोगों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी कर रहा है। प्रवासियों को सलाह दी गई है कि वे स्थानीय सरकारी गाइडलाइंस का पालन करें और दूतावास के संपर्क में रहें।




