ईरान और अमेरिका के बीच चल रही खींचतान में एक नया मोड़ आया है. ईरान ने अपनी शर्तों में बदलाव करके एक नया प्रस्ताव तैयार किया है और इसे पाकिस्तान के जरिए अमेरिका भेजा है. इस पूरी कोशिश का मकसद दोनों देशों के बीच बातचीत को फिर से पटरी पर लाना है.
पाकिस्तान की भूमिका और ईरान का नया प्रस्ताव क्या है?
30 अप्रैल 2026 को ईरान ने अपना संशोधित प्रस्ताव पाकिस्तानी मध्यस्थों को सौंपा. पाकिस्तान इस समय ईरान और अमेरिका के बीच एक पुल का काम कर रहा है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने पहले ही संकेत दिया था कि उन्हें ईरान से किसी नए ऑफर का इंतजार है. ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अपनी इस्लामाबाद यात्रा को बहुत सफल बताया और कहा कि वहां नेतृत्व के साथ अच्छी चर्चा हुई.
अमेरिका और UAE का इस पर क्या कहना है?
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के पुराने प्रस्ताव पर नाराजगी जताई थी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि ईरान डील करने के लिए बहुत बेताब है. दूसरी तरफ, UAE के राष्ट्रपति सलाहकार Anwar Gargash ने 1 मई को कहा कि Strait of Hormuz को लेकर ईरान की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता. ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने चेतावनी दी कि अमेरिका फिर से हमला कर सकता है क्योंकि वाशिंगटन पर से भरोसा पूरी तरह खत्म हो चुका है.
अभी की स्थिति क्या है और आगे क्या होगा?
- 8 अप्रैल 2026 से युद्धविराम लागू है, लेकिन स्थायी शांति अभी दूर दिख रही है.
- ईरान के सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei ने कहा है कि परमाणु और मिसाइल क्षमता से कोई समझौता नहीं होगा.
- खामनेई का मानना है कि खाड़ी देशों के भविष्य में अमेरिका की कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
- खबरें हैं कि ईरान के अंदरूनी नेतृत्व में मतभेद हैं और कुछ लोग विदेश मंत्री Abbas Araghchi को हटाने की मांग कर रहे हैं.
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत कौन करा रहा है?
इस बातचीत में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और ईरान के प्रस्तावों को अमेरिका तक पहुँचाने का काम कर रहा है.
UAE ने ईरान के बारे में क्या चिंता जताई है?
UAE ने कहा कि Strait of Hormuz को लेकर ईरान के एकतरफा फैसलों और इंतजामों पर भरोसा नहीं किया जा सकता.