ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब काफी खतरनाक मोड़ पर पहुँच गया है क्योंकि 6 अप्रैल 2026 को तेहरान में भारी बमबारी की गई। अमेरिकी और इसराइली सेना ने मिलकर ईरान की सबसे मशहूर शरीफ यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी को अपना निशाना बनाया जिससे वहां की इमारतों को भारी नुकसान हुआ है। ईरान के प्रथम उप-राष्ट्रपति मोहम्मद रज़ा आरिफ ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का पागलपन बताया है।
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यूनिवर्सिटी में हुए नुकसान की पूरी जानकारी
यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट मसूद तज्रिशी ने जानकारी दी है कि हमले में सूचना और संचार तकनीक (ICT) वाली इमारत को सीधा निशाना बनाया गया। इस हमले की वजह से यूनिवर्सिटी का डाटा सेंटर पूरी तरह ठप हो गया है जो ईरान के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्रोग्राम के लिए बहुत ज़रूरी था। गनीमत रही कि हमले के समय कैंपस में छात्र मौजूद नहीं थे क्योंकि पढ़ाई पहले से ही ऑनलाइन चल रही थी, इसलिए किसी छात्र की जान जाने की खबर नहीं है। हालांकि यूनिवर्सिटी के पास एक गैस स्टेशन पर हमला होने से आसपास के इलाकों में गैस की सप्लाई बंद हो गई है।
हमले के बाद के हालात और मुख्य आंकड़े
| विषय | महत्वपूर्ण जानकारी |
|---|---|
| कुल मौतें | पूरे ईरान में हुए हमलों में 25 से ज़्यादा लोग मारे गए |
| बड़े अधिकारी की मौत | रिवोल्यूशनरी गार्ड के इंटेलिजेंस चीफ माजिद खादेमी की मौत हुई |
| ईरान का जवाब | ईरान ने इसराइल के हाइफ़ा शहर पर मिसाइलें दागी हैं |
| डिजिटल नुकसान | यूनिवर्सिटी की वेबसाइट और ऑनलाइन पढ़ाई का सिस्टम बंद हुआ |
| मुख्य कारण | ट्रम्प ने होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की डेडलाइन दी थी |
ईरान के उप-राष्ट्रपति आरिफ ने कहा कि ट्रम्प को यह बात समझ नहीं आती कि ईरान का ज्ञान सीमेंट की इमारतों में नहीं बल्कि वहां के शिक्षकों और बुद्धिजीवियों के इरादों में बसा है। उन्होंने साफ़ किया कि किसी भी तरह की बमबारी ईरान से उसके ज्ञान और विज्ञान को नहीं छीन सकती। यह हमला उस समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवाद गहराया हुआ है और ट्रम्प ने सैन्य कार्रवाई की धमकियां दी थी।
